कब आपको वक्त से पहले ही होम लोन को चुका देना चाहिए? जानिए हर जरूरी जानकारी

होम लोन आमतौर पर बड़ी राशि और लंबी अवधि के लिए होते हैं. होम लोन से ग्राहक पर बड़ा वित्तीय बोझ पड़ता है और अगर उसने सही से प्रबंधन न किया हो तो उसका बजट भी बिगड़ सकता है. होम लोन प्री-पेमेंट से आपको कई वित्तीय फायदे मिल सकते हैं और यह ब्याज दर का बोझ भी कम कर देता है. ब्याज दरें घटने से होम लोन की कुल लागत को भी कम किया जा सकता है.

भारत में होम लोन की औसत अवधि करीब 10 साल की होती है. लिहाजा, होम लोन प्री-पेमेंट के विकल्प को ग्राहक सबसे ज्यादा चुनते हैं ताकि होम लोन के बोझ से छुटकारा मिल जाए. समय से पहले ही लोन को चुका देना हमेशा ग्राहक के लिए फायदेमंद साबित होता है. लेकिन बैंक या कर्जदाता के लिए यह एक तरह का नुकसान होता है. यही मुख्य वजह है कि बैंक प्री-पेमेंट से कतराते हैं. अगर ग्राहक खुद ब्रांच न जाए तो बैंक फोरक्लोजर एप्लिकेशन को मंजूर करने से ही मना कर देते हैं. सबसे चौंकाने वाली बात है कि अधिकतर कर्जदाताओं ने हाउसिंग लोन के प्रीपेमेंट का विकल्प चालू ही नहीं किया होता. लेकिन एक अहम पॉइंट होना जरूरी है कि अगर कोई शख्स खुद उपलब्ध नहीं है तो उसकी ओर से कोई प्रतिनिधि बनकर प्राधिकार पत्र के साथ ब्रांच जाकर होम लोन प्रीपेमेंट की प्रक्रिया शुरू करा सकता है.

अधिकतर बार, ग्राहक इस उधेड़बुन में होते हैं कि वे होम लोन का समय से पहले ही भुगतान कर दें या फिर उन पैसों को अन्य विकल्पों में निवेश करें. ऐसी स्थितियां तब पैदा होती हैं, जब ग्राहक को सैलरी इंक्रीमेंट या फिर बोनस मिलता है. ऐसे समय में, ग्राहक को सावधानीपूर्वक प्रीपेमेंट पेनाल्टी (अगर है तो) का मूल्यांकन करना चाहिए और उसके बाद किसी फैसले पर पहुंचना चाहिए. हर मामले में रिटर्न की दर चाहे वो निवेश हो या प्रीपेमेंट, ग्राहक को सभी विकल्प जांच लेने चाहिए. बिना किसी शक के ग्राहक हमेशा प्री-पेमेंट ऑप्शन को बाकी तरीकों से अधिक बेहतर पाएंगे. होम लोन फोरक्लोजर या होम लोन प्रीपेमेंट ज्यादातर मामलों में लगभग 8% से 9% औसत रिटर्न देता है.

इसके अलावा, जब कोई ग्राहक होम लोन के प्री-पेमेंट पर फोकस करता है तो पूरा इंट्रस्ट रेट आउटफ्लो खुद-ब-खुद कम हो जाता है. ऐसे कई होम लोन ग्राहक हैं जो इस बात को लेकर संशय में रहते हैं कि ईएमआई कम कराई जाए या फिर लोन अवधि. लेकिन लंबे समय के लिए देखा जाए तो होम लोन की अवधि कम कराने में ही समझदारी है. वह इसलिए क्योंकि जब किसी शख्स की सैलरी बढ़ती है तो वह अपनी ईएमआई भी बढ़वा सकता है. इससे होम लोन को समय से पहले भी चुकाया जा सकता है. अगर मुमकिन हो तो ग्राहक अतिरिक्त ईएमआई का भी भुगतान कर सकते हैं.

सामान्य नीति के मुताबिक, ग्राहक पूरे साल में एक अतिरिक्त ईएमआई का भुगतान कर सकता है. अगर ग्राहक दोनों विकल्प को जोड़ना चाहे यानी ईएमआई राशि में इजाफा और एक अतिरिक्त ईएमआई का भुगतान तो होम लोन प्री-पेमेंट की सटीक योजना बनाई जा सकती है.

लेकिन ऐसी कई चीजें हैं, जिसे ग्राहक को लोन समय से पहले बंद करते समय याद रखनी चाहिए. ग्राहक को अहम दस्तावेज जैसे आईडी प्रूफ जमा कराना होगा. जो पेमेंट आपने की है, उसकी रसीद जरूर ले लें. रसीद में प्री-पेमेंट के बाद मूल बकाया राशि, बैलेंस होम लोन की अवधि और नई मासिक किस्त के बारे में लिखा होना चाहिए. रसीद पर बैंक या कर्जदाता की स्टैंप और दस्तखत होने चाहिए. अगर मासिक किस्त आगे की तारीखों के चेक के जरिए कटती है तो ग्राहक को नई ईएमआई राशि वाले नए चेक जारी करने चाहिए. इसी दौरान, गलत इस्तेमाल न हो इसके लिए ग्राहक को पुराने चेक वापस ले लेने चाहिए. ग्राहक को चेक के पीछे अपना नाम, होम लोन अकाउंट नंबर, मोबाइल नंबर इत्यादि लिखना चाहिए.

ऐसे कई बैंक हैं जो होम लोन प्रीपेमेंट में इस्तेमाल हो रहे फंड का सोर्स चेक करते हैं.इसलिए ग्राहक को अपने पास पिछले 6 महीने के बैंक स्टेटमेंट रखनी चाहिए, जिसके जरिए वह होम लोन का समय से पहले भुगतान कर रहा है. इसके अलावा सुनिश्चित करें कि प्रीपेमेंट की जानकारी आपके CIBIL में जरूर अपडेट हो. आमतौर पर ये जानकारी 45-60 दिनों में अपडेट हो जाती है. इसलिए आप 60 दिन बाद इसके लिए अपनी CIBIL  रिपोर्ट देख सकते हैं.

होम लोन पर टैक्स छूट

जिस घर के लिए आपने होम लोन लिया है, उसमें खुद रह रहे हैं तो वित्त वर्ष में होम लोन में चुकाए गए ब्याज पर सेक्शन 24 के तहत अधिकतम 2 लाख रुपये तक की टैक्स छूट मिलती है. जो होम लोन ग्राहक ज्यादा टैक्स वाली श्रेणी में आते हैं, उनके लिए यह प्रावधान एक साल में टैक्स को घटाकर 60,000 कर देता है.

पहली बार घर खरीद रहे ग्राहकों को सेक्शन 80ईई के तहत चुकाए गए ब्याज पर 50 हजार रुपये की अतिरिक्त छूट दी जाती है. होम लोन की मूल राशि पर, सेक्शन 80सी के तहत एक और टैक्स छूट मिलती है. इसमें होम लोन ग्राहक 1.5 लाख रुपये तक टैक्स छूट हासिल कर सकता है. इसलिए, अपना होम लोन चुकाते वक्त इन चीजों को न भूलें. पहले कैलकुलेट करें, उसके बाद ही कोई फैसला लें.

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