होम लोन ईएमआई को कम करने के सबसे बेहतर तरीके

होम लोन ईएमआई

जो शख्स होम लोन ले चुका हो, उसके लिए ईएमआई किसी बोझ से कम नहीं है. यह आपकी मासिक तनख्वाह से ही कटेगी. यह आपकी इनकम का 30-40 प्रतिशत हिस्सा खा जाती है, लिहाजा यह आपके मासिक बजट का सबसे बड़ा खर्चा है. इसलिए यह एक अच्छा आइडिया है कि किसी भी तरीके से अपने होम लोन की ईएमआई को कम कराया जाए. जब आप होम लोन लेते हैं तो आपकी ईएमआई कई चीजों जैसे उस पर चुकाया जाने वाला ब्याज और लोन की अवधि पर निर्भर करती है.

आइए अब उन तरीकों पर चर्चा करते हैं, जिनके जरिए एक नया या मौजूदा होम लोन ग्राहक अपनी ईएमआई का बोझ कम कर सकता है.

 

सबसे कम संभावित ब्याज दर पर होम लोन लेने की कोशिश करें

ब्याज दर एक अहम फैक्टर है, जिस पर आपके होम लोन की ईएमआई निर्भर करती है. अगर ब्याज दर कम है तो लिए हुए लोन पर आपको कम ब्याजा चुकाना होगा, जिससे आपकी ईएमआई भी कम हो जाएगी. अगर आप होम लोन लेने की सोच रहे हैं तो यह देखें कि जिस कर्जदाता से आप लोन ले रहे हैं, वे किस ब्याज दर पर आपको मुहैया करा रहा है. उसकी बाजार में मौजूद अन्य विकल्पों के साथ तुलना करें और फिर जो सबसे कम दरों पर लोन दे रहा हो, उसे सिलेक्ट करें.

उदाहरण के तौर पर पंजाब नेशनल बैंक 8.5 प्रतिशत की ब्याज दर पर होम लोन दे रहा है जबकि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया 8.35 प्रतिशत पर. यहां आपको फर्क मामूली लग रहा होगा. लेकिन जब आप पूरी अवधि की कैलकुलेशन करेंगे तो फर्क बहुत बड़ा निकलेगा.

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ज्यादा डाउन पेमेंट

शायद आपको इस बारे में पता न हो लेकिन ज्यादा डाउन पेमेंट देकर आप होम लोन की ईएमआई के बोझ को कम करा सकते हैं. ज्यादा डाउन पेमेंट देने से आपके लोन की मूल राशि (प्रिंसिपल अमाउंट) कम हो जाएगी. इस तरीके से आसानी से समझें- मान लीजिए कि जो घर आप खरीदना चाहते हैं, वो 70 लाख रुपये का है और आप बतौर डाउन पेमेंट 8 लाख रुपये देते हैं तो  आपको बाकी बचे 62 लाख और ब्याज की ईएमआई को चुकाना है.

प्री-पेमेंट और पार्ट पेमेंट

ऐसे कई मौके होते हैं हमारे करियर में जब हमें बोनस या इन्सेंटिव्स मिलते हैं. ऐसा भी समय आता है, जब आपके निवेश या सेविंग्स बैंक अकाउंट में एक बड़ी राशि के तौर पर तब्दील हो जाती है. जब ऐसा होता है तो ज्यादातर लोग इसे ऐशो-आराम, गैजेट्स खरीदना, ट्रैवल और अन्य चीजों में उड़ा देते हैं. लेकिन इन पर पैसा लुटाने की जगह आपको अपने होम लोन को प्राथमिकता देनी चाहिए. आपको लोन में प्री-पेमेंट के बारे में सोचना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि होम लोन आपकी मासिक आय का ज्यादातर हिस्सा खा जाता है और ऐसा करने से आपकी ईएमआई काफी हद तक कम हो सकती है.

बैलेंस ट्रांसफर

ईएमआई के बोझ को कम करने का एक और तरीका यह है कि अपने होम लोन को किसी ऐसे कर्जदाता के पास ट्रांसफर करा लिया जाए, जो वही लोन कम ब्याज दर पर दे रहा हो. अगर कर्जदाता नहीं बदलना चाहते तो उसी कर्जदाता के पास अपना प्लान भी बदलवा सकते हैं. लेकिन इसके लिए कर्जदाता के पास कोई अन्य प्लान होना चाहिए. कर्जदाता बदलना भी एक अच्छा विकल्प है क्योंकि इससे आपका काफी पैसा बचेगा, जो आपने ब्याज के लिए भुगतान किया होगा. लेकिन ऐसा करने से पहले, अपने मौजूदा कर्जदाता के पास लोन के फोर-क्लोजर में शामिल कुल राशि की कैलकुलेशन जरूर कर लें. इसके अलावा फिर एक नए कर्जदाता से कर्ज लेने में शामिल लागत की गणना करना भी जरूरी है. अगर इन दोनों का योग, जो आप बचाने जा रहे हैं, उससे कम है तो आपको इसी विकल्प के साथ जाना चाहिए.

 

लंबी पुनर्भुगतान की अवधि को चुनें:

लोन की अवधि और ईएमआई एक-दूसरे के विपरीत आनुपातिक हैं. जितनी लंबी अवधि होगी, उतनी कम आपकी ईएमआई होगी और जितनी छोटी अवधि होगी, उतनी ही ज्यादा ईएमआई होगी. लेकिन लंबी अवधि चुनने से आपको ज्यादा भुगतान करना पड़ सकता है क्योंकि आपको ब्याज पर ज्यादा चुकाना होगा. इसलिए अगर आपको ब्याज की फ्रिक नहीं है और ईएमआई को कम रखना चाहते हैं तो आप लंबी पुनर्भुगतान अवधि चुन सकते हैं. लेकिन इस विकल्प को तब चुनें, जब आपको लगे कि आप ज्यादा ईएमआई नहीं चुका सकते.

मुझे लगता है कि इस आर्टिकल से आपको होम लोन ईएमआई का कॉन्सेप्ट समझ आया होगा, साथ ही जो फैक्टर्स इसे प्रभावित करते हैं, उनकी भी जानकारी मिली होगी. लिहाजा, ऊपर बताए गए पॉइंट्स को ध्यान में रखते हुए आप अपने होम लोन की ईएमआई घटा सकते हैं.

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