जानिए क्यों कर्जदाता व्यापारियों को कर्ज देने से मना कर देते हैं?

जब बात बिजनेस के लिए लोन देने की आती है तो लोन फॉर बिजनेस एक आसान और तेज विकल्प है. बिजनेस लोन बैंक, एनबीएफसी और अन्य कर्ज देने वाले संस्थानों से लिया जा सकता है.

हालांकि सभी लोन की अर्जियां मंजूर नहीं होतीं. खासकर जब आप लघु, मध्यम और छोटे (MSME) लोन के लिए अप्लाई करते हैं. आज हम आपको बता रहे हैं कि आखिर क्यों छोटे व्यापारियों को लोन रिजेक्ट हो जाते हैं. आइए कुछ कारणों पर चर्चा करते हैं:

खराब क्रेडिट स्कोर

लोन अप्रूव करने से पहले कर्जदाता जो सबसे पहली चीज देखते हैं, वो होता है क्रेडिट स्कोर. यह बताता है कि कैसे बिजनेस मालिक अपना और व्यापार का वित्त प्रबंधन करते हैं. अगर व्यापारी समय पर बिल और देयता चुकाता है तो उसका क्रेडिट स्कोर काफी हाई हो जाता है. इसलिए जितना ज्यादा क्रेडिट स्कोर होगा, उतने ही लोन अप्रूव के चांस होंगे.

लेकिन अच्छी खबर यह है कि अगर क्रेडिट या CIBIL स्कोर खराब भी है तो भी व्यापारी उसे ठीक करने के लिए कदम उठा सकते हैं. बस समय पर सभी बिलों का भुगतान करें और नियंत्रण में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करें. वहीं व्यापारी को अपनी क्रेडिट रिपोर्ट भी देखनी चाहिए और सारे गलत एंट्रीज सही करनी चाहिए.

कमजोर कैश फ्लो

अच्छे कैश फ्लो के लिए एक अच्छा बिजनेस प्लान होना जरूरी है. हालांकि इन दोनों के बिना लोन एप्लिकेशन रिजेक्ट हो सकती है. ऐसा इसलिए क्योंकि कर्जदाता चाहते हैं कि ग्राहक का कैश फ्लो अच्छा हो ताकि वह लोन वापस चुका सके. सिर्फ अच्छा कैश फ्लो होने पर ही बिजनेस लोन को मंजूरी मिल सकती है.

बिजनेस मालिक अपनी आय और देयता के लिए बजट बनाकर उसे सख्ती से फॉलो कर सकते हैं. इससे व्यापारी को अपनी आय और खर्च के बारे में आइडिया मिल जाएगा. अगर बिजनेस का कमजोर कैश फ्लो है और वर्किंग कैपिटल में कमी है तो व्यापारी को अपने खर्चे कम करने होंगे और बिजनेस आय पैदा करने के लिए मौके तलाशने होंगे ताकि लोन मिलने के चांस बढ़ जाएं.

बिजनेस विंटेज और कोलेटरल की जरूरत

बिजनेस कितने वक्त से चल रहा है, लोन देने वाले इस बात का भी ध्यान रखते हैं. आमतौर पर कर्जदाता लोन देने के लिए स्थिरता और प्रॉफिट के नाम पर 2 साल का वक्त मांगते हैं. इसके अतिरिक्त, कुछ कर्जदाता बतौर गारंटी कुछ रखने को कहते हैं जैसे रियल एस्टेट या मशीनरी ताकि अगर व्यापारी कर्ज चुकाने में नाकामयाब रहता है तो कर्ज गारंटी के लिए हासिल किया जा सके. लेकिन अगर व्यापारी कोई चीज बतौर गारंटी रखना नहीं चाहता तो वह एनबीएफसी से लोन ले सकता है. उनकी कर्ज देने की प्रक्रिया काफी सरल और तेज है.

तैयारी में कमी

कर्ज पाना कोई आसान चीज नहीं है. ऐसा नहीं है कि आप कर्जदाता के पास जाकर लोन एप्लिकेशन से ऋण के लिए अप्लाई कर दें. आपको हर चीज के लिए तैयार रहना होगा. लोन अप्लाई करने से पहले आपको ये दस्तावेज तैयार रखने होंगे.

– बैंक स्टेटमेंट और पीएनएल स्टेटमेंट के अलावा वित्तीय विवरण और अनुमान.

– बिजनेस प्लान और कैश फ्लो स्टेटमेंट

– क्रेडिट रिपोर्ट्स-पर्सनल एंड बिजनेस

– टैक्स रिटर्न्स

– केवाईसी एंड लीगल दस्तावेज-आईडी प्रूफ, अड्रेस प्रूफ, ऑफिस लीज इत्यादि.

जोखिम भरा बिजनेस और बिजनेस वैल्यू का अभाव

इंडस्ट्री और उसकी प्रकृति को देखते हुए कुछ कर्ज देने वाले संस्थान कुछ बिजनेस को जोखिम भरा मानते हैं. ये बिजनेस हैं रियल एस्टेट, शराब की दुकान, बिटकॉइन आदि. इनके लिए कर्ज देने वालों को लोन के लिए मनाना मुश्किल होता है. कोई भी कर्ज देने वाला जोखिम नहीं लेना चाहता और वे ऐसे बिजनेस वेंचर्स से दूर रहते हैं, जिनका भविष्य जोखिम भरा होता है.

इसके अलावा कर्जदाता ऐसे बिजनेस से भी दूर रहते हैं, जिनकी ग्रोथ की संभावना आगे कम होती है. आंकड़ों का मूल्यांकन बिजनेस ऑर्डर बुक्स, फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और मार्केट साइज के आधार पर किया जाता है. कुछ कर्जदाता सिर्फ कुछ खास बिजनेस सेक्टर्स को ही कर्ज देते हैं.

लोन का गलत इस्तेमाल

बिजनेस लोन एप्लिकेशन के रिजेक्ट होने का एक बड़ा कारण क्रेडिट कार्ड्स का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल और क्रेडिट उपयोग की दर होती है. यह संतुलन से सीमा का अनुपात होता है. इसका मतलब है कि कितना व्यापारी हकदार है और उसके लिए कितनी राशि उपलब्ध है.

लिहाजा, अगर व्यापारी लोन अप्लाई करने से पहले ऊपर बताए गई सभी बातों को ध्यान में रखेगा तो उसका लोन अप्रूव होने के चांस कुछ हद तक बढ़ जाएंगे.

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