किफायती आवास के लिए छोटा होम लोन चुनने के क्या हैं कारण

Home Loan for Affordable Housing

इन दिनों वित्तीय संस्थानों ने 30-35 लाख रुपये तक के लोन्स को छोटे होम लोन की श्रेणी में रख दिया है. इस तरह के लोन सिर्फ कम आय वाले समूह के लिए ही नहीं होते बल्कि उनके लिए भी जो छोटे घर खरीद रहे हैं. छोटा घर लेने का मतलब है कम उधार लेना. इसके अलावा, इस ट्रेंड के पीछे कई फायदे छिपे हैं.

इसके साथ-साथ केंद्र सरकार के कदम भी किफायती आवास को बढ़ावा दे रहे हैं. खासतौर पर  पहली बार के खरीदार ही इस ट्रेंड को आगे ले जा रहे हैं. वहीं छोटा होम लोन लेने से किसी शख्स की जेब पर भी असर नहीं पड़ेगा. छोटा घर होने का मतलब है कि आपका बिजली का बिल, पानी का बिल, रजिस्ट्रेशन चार्जेज, जीएसटी और स्टैंप ड्यूटी कम होगी. साथ ही कार्पेट एरिया से जुड़ी मेंटेनेंस लागत भी बड़े अपार्टमेंट्स की तुलना में कम होती है.

आज हम आपको उन फायदों के बारे में बताएंगे, जो आप छोटा होम लोन लेते वक्त उठा सकते हैं.

लाभ के लिए वेतनभोगी वर्ग

अपनी उम्र से 20वें पड़ाव पर वेतनभोगी युवा छोटा घर ले सकते हैं. लेकिन आने वाले वर्षों में उनकी आय बढ़ेगी. उन्हें कम ईएमआई देनी पड़ेगी और इसमें जो जुड़ेगा, वो होगा रुपये का मूल्यह्रास. इस तरह, कुछ लोग लोन का भुगतान जल्दी से कर सकते हैं और किराया-मुक्त जीवन का आनंद ले सकते हैं, जबकि अन्य आय लाभ हासिल करने के लिए ईएमआई को न्यूनतम रखने का विकल्प चुन सकते हैं.

LTV फैक्टर

LTV का मतलब है लोन टू वैल्यू रेश्यो. जब बात छोटे होम लोन लेने की आती है तो ग्राहक को सबसे पहले अपना फाइनेंस देखना चाहिए. अगर कोई 40 लाख रुपये का घर खरीदने के लिए 20 लाख रुपये का लोन लेना चाहता है तो उसको एक से अधिक बैंक जाना पड़ेगा. अगर पहला कर्जदाता 9 प्रतिशत की ब्याज दर पर 20 लाख रुपये का लोन 20 साल के लिए दे रहा है और अन्य कर्जदाता 20 साल के लिए 15 लाख रुपये का लोन 8.5 प्रतिशत की ब्याज दर पर दे रहा है तो आवेदक को अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए पहला विकल्प चुनना चाहिए. दूसरे विकल्प के लिए, आवेदक को उसी कारण के लिए 5 लाख रुपये का इंतजाम और करना होगा, जिससे पूरी खरीद लेनदेन में गिरावट आएगी. लिहाजा, इस वजह के लिए आपको ज्यादा लोन टू होम रेश्यो चुकानी होगी. सीधे शब्दों में ज्यादा एलटीवी का मतलब ज्यादा ईएमआई और ज्यादा लोन राशि.

डाउन पेमेंट के लिए सेविंग्स करें

छोटे होम लोन के प्रकार और आपके द्वारा चुने गए वित्तीय संस्थान के आधार पर, आपकी डाउन पेमेंट की जरूरत 2.25 प्रतिशत से भिन्न हो सकती है यानी घर की खरीद मूल्य का 20 प्रतिशत. आपका मासिक बजट आपके डाउन पेमेंट की राशि निर्धारित करने में मदद करेगा. एक बार यह पता लगने के बाद कि आपका बजट कितना है आप अपने बैंक खाते में पैसे बचाना शुरू कर दें. जितनी ज्यादा डाउन पेमेंट होगी, उतना ही ज्यादा फायदा होगा.

होम लोन की कम ब्याज दर

छोटे होम लोन का मतलब है कम ब्याज दर. इसका सीधा सा मतलब है कि इस तरह का लोन सह-उधारकर्ताओं और लोन गारंटियों के लिए कम थकाऊ होगा.

जानें कैसे तुलना करें ऑफर्स

हर कर्जदाता के नियम व शर्तों, ब्याज दर, फीस में काफी फर्क होता है. उन सभी फैक्टर्स को समझना जरूरी है जो आपके गिरवी की कीमत को निर्धारित करते हैं. तो आप किए जा रहे ऑफ़र की पूरी तरह से तुलना कर सकते हैं.

छोटे होम लोन लेने के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है

– केवाईसी दस्तावेज सबसे अहम हैं
– अधिकतम लोन वैल्यू 20-25 लाख रुपये
– नियमित होम लोन उत्पाद की तुलना में ज्यादा ब्याज दर
– 20 साल तक होम लोन की अवधि
– घर के वैल्यू के 85 प्रतिशत तक लोन
– महिला सह आवेदक का होना जरूरी है
– न्यूनम कम आय जरूरी है

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आवेदक को मासिक किश्तों पर अपनी आय के एक-तिहाई हिस्से से ज्यादा खर्च नहीं करना चाहिए. इससे ज्यादा खर्च करने का मतलब है कि आपको भविष्य में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. अगर ईएमआई व्यक्ति की आय के 35 से 40 प्रतिशत से ज्यादा होती है तो आवेदक के पास न के बराबर पैसा या फर्नीचर खरीदने, नई कार खरीदने या मासिक बिल चुकाने के लिए थोड़े ही पैसे बचेंगे. यही कारण है कि एक्सपर्ट्स ग्राहकों को कम कर्ज से आय का अनुपात रखने को कहते हैं, ताकि आवेदक की मासिक किस्त उसकी आय के एक तिहाई से ज्यादा न हो.

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*