प्रॉपर्टी के एवज में लोन लेने के बारे में सोच रहे हैं, ये हैं तरीके

Planning for Loan Against Property

बेशक प्रॉपर्टी हर शख्स के लिए एक परिसंपत्ति है. इसे किराया पाने या फिर प्रॉपर्टी के एवज में लोन लेकर पैसे हासिल करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. जी हां आप पैसों के उपयोग पर किसी भी प्रतिबंध के बिना अपनी संपत्ति के बाजार मूल्य के एवज में एक निश्चित प्रतिशत तक लोन ले सकते हैं.

प्रॉपर्टी के एवज में लोन एक सुरक्षित लोन है, जो नौकरीपेशा और स्वयं रोजगार वालों के लिए उपलब्ध है. यह लोन किसी प्रॉपर्टी, रिहायशी या कमर्शियल को गिरवी रखकर शादी के खर्चे, मेडिकल इमरजेंसी, बिजनेस बढ़ाने और अन्य कामों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. आइए आपको कुछ स्टेप्स बताते हैं, जिससे आप प्रॉपर्टी के एवज में लोन का सर्वश्रेष्ठ इस्तेमाल कर सकते हैं.

रिसर्च करें

ऐसे कई संस्थान हैं, जो प्रॉपर्टी के एवज में लोन देते हैं. जो सबसे पहले कर्जदाता मिले, उसे ही न चुन लें. इस पर पहले गहन रिसर्च करें, उसके बाद ही किसी बैंक या एनबीएफसी को चुनें. डील फाइनल करने से पहले कुछ अहम चीजें हैं, जिनकी तुलना करनी जरूरी है, वे हैं- ब्याज दरें, प्रोसेसिंग फीस, अन्य शुल्क और फोरक्लोजर चार्जेज के अलावा स्टेटमेंट चार्जेज.

लंबी अवधि का लोन चुनें

चाहे आप प्रॉपर्टी के एवज में लोन अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करें या फिर निजी जरूरतों को पूरा करने के लिए, बेहतर यही होगा कि आप लोन की अवधि लंबी चुनें. इससे न सिर्फ आपकी ईएमआई कम होगी बल्कि आपको कुछ पैसे बचाने में भी मदद करेगी, ताकि आप भविष्य में लोन को समय से पहले चुकाकर बंद कर दें. दूसरी ओर कम अवधि के लोन में ईएमआई ज्यादा होती है और आप पर बोझ डालने के अलावा डिफॉल्ट का जोखिम भी रहता है.

लेकिन अवधि और प्रीपेमेंट प्लान पर कोई भी फैसला लेने से पहले कर्जदाता की ओर से प्रस्तावित पूर्वभुगतान शुल्क के बारे में जानना अहम है. यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि कहीं प्रीपेमेंट करने से आपकी सेविंग्स तो नहीं घट जाएंगी.

अधिक इस्तेमाल को मना कर दें

प्रॉपर्टी के एवज में लोन से आपके पास मौका है कि आप ज्यादा राशि का लोन (50 करोड़) ले सकते हैं वो भी कम ब्याज दर पर. ऐसे में कई ग्राहक अपनी जरूरत से ज्यादा राशि ले लेते हैं.

इससे जोखिम का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि आप पर प्रॉपर्टी खोने का खतरा हो जाता है. यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि अगर लोन चुकाने में चूक होती है तो कर्जदाता प्रॉपर्टी बेचकर अपना पैसा हासिल करेगा. लिहाजा सिर्फ उतना ही लोन लें, जितना आप वापस चुका सकें.

उतावले होने से पहले चेक करें

इसका सीधा मतलब है कि कोई कर्जदाता चुनने से पहले हर जानकारी चेक करें. यह ध्यान रखें कि जिसकी कम ब्याज दरें हों, जरूरी नहीं कि वह सही कर्जदाता ही हो. प्रोसेसिंग फीस, फोरक्लोजर चार्जेज, लेट पेमेंट पेनाल्टी और लोन टू वैल्यू रेश्यो भी उतना ही आपके लिए जरूरी है. इन सब बातों के बारे में जानकार ही आपको फैसला करना चाहिए कि कौन सा कर्जदाता चुनना है.

ऊपर बताई गईं बातों से प्रॉपर्टी के एवज में लोन की अहमियत पता चलती है. लेकिन यह जरूर ध्यान रखें कि बिना अपनी जरूरत को समझे इसके लिए अप्लाई करने से प्रॉपर्टी के एवज में लोन का मकसद खत्म हो जाएगा. इसलिए आवेदक के हित में यही है कि वह स्थिति और जरूरत को समझे. इन पॉइंट्स को ध्यान में रखते हुए आप प्रॉपर्टी के एवज में लोन का पूरा फायदा उठा पाएंगे.

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