क्या कोविड-19 लोन लेना चाहते हैं? इन बातों को लेकर बरतें सावधानी

Opting For COVID-19 Loan? Exercise Some Caution

इस बात में कोई संदेह नहीं कि COVID-19 (कोविड-19) ने बड़े स्तर पर हमारे जनजीवन पर असर डाला है. दुनियाभर में व्यापारों को भारी चपत लगी है. सैलरी में कटौती, वेतन में देरी या फिर नौकरी जाने का सिलसिला आम हो चला है. लोगों की ऐसे मुश्किल वक्त में मदद करने के लिए भारतीय बैंकों और एनबीएफसी ने कम ब्याज दर वाला पर्सनल लोन लॉन्च किया है, जिसमें ब्याज दरें 7.25 प्रतिशत है. वास्तव में ऐसे कई बैंक हैं, जो 7.25-8.45 प्रतिशत की ब्याज दर पर लोन ऑफर कर रहे हैं. इन लोन को कोविड-19 पर्सनल लोन कहा जा रहा है क्योंकि ये कोरोना वायरस महामारी के मुश्किल वक्त में लोगों को पैसों की तंगी से उबारने में मदद करेंगे. लेकिन आपको इस लोन के लिए अप्लाई तभी करना चाहिए, जब आपको लगे कि आपको सच में इसकी जरूरत है.

किसे है कोविड-19 लोन की जरूरत?

मौजूदा स्थिति में दो तरह के लोग हैं. पहले वो जिन्हें मौजूदा स्थिति के कारण पैसों की तंगी हो गई है. दूसरे वो जिनकी जिंदगी पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है.

इसलिए कहा जा सकता है कि पहले वालों को मदद की जरूरत ज्यादा है जबकि दूसरे समूह को किसी लोन की जरूरत नहीं है, भले ही ब्याज दर कम हों. आपको यह नहीं भूलना चाहिए कि लोन आखिरकार एक कर्ज है, जिसे ब्याज समेत चुकाना पड़ता है.

यह बताना जरूरी है कि सिर्फ मौजूदा ग्राहक, जिनकी अच्छी साख (सैलरी अकाउंट और स्थिर नौकरी) है या ग्राहक जिनकी अच्छी क्रेडिट हिस्ट्री है, वे कोविड-19 लोन ले सकते हैं.

पुनर्भुगतान पर मोरटोरियम

कोविड-19 पर्सनल लोन पर मोरटोरियम पीरियड उपलब्ध है, जिससे ग्राहक राहत की सांस ले सकते हैं. लेकिन यह भूलना नहीं चाहिए कि मोरटोरियम कोई ब्याज या ईएमआई पर छूट नहीं है. ब्याज लगता रहेगा और यह लोन के कुल पुनर्भुगतान में जुड़ जाएगा.

सावधानी की डोर

अगर आप कोविड-19 लोन लेने की प्लानिंग कर रहे हैं तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए. उदाहरण के तौर पर अगर कोई कोविड-19 पर्सनल लोन इसलिए लेना चाहता है क्योंकि वह कैश की तंगी से जूझ रहा है. लेकिन कुछ महीनों में पुनर्भुगतान शुरू हो जाएगा. इसलिए अगर ग्राहक को लगता है कि पैसों की तंगी की समस्या कुछ दिनों में पूरी हो जाएगी तो इस लोन को चुनना कोई बुरा आइडिया नहीं है. लेकिन अगर स्थिति ऐसी है कि ग्राहक को लगता है कि पैसों की तंगी की समस्या कुछ समय तक चलेगी तो ईएमआई का अतिरिक्त बोझ अपने ऊपर न ही लें.

इस स्थिति में अगर आपके पास कोई इमरजेंसी फंड है तो वो आपके लिए बहुत काम का साबित होगा. लेकिन अगर आपके पास कोई इमरजेंसी फंड नहीं है तो आपके लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट भी काम आ सकते हैं.

वास्तव में यह सही है कि अपने लॉन्ग टर्म सेविंग्स को तोड़ना एक अच्छा आइडिया नहीं है लेकिन अगर आपके पास कोई और चारा नहीं बचा है और पैसों की तंगी की समस्या बढ़ती जा रही है तो वास्तव में इस लोन को चुनकर खुद पर ईएमआई का बोझ बढ़ाना समझदारी नहीं है.

कोविड-19 पर्सनल लोन लेना आखिरी विकल्प होना चाहिए. खासकर तब जब आप भविष्य में अपने कैश फ्लो को लेकर श्योर न हों और देखें कि समस्या गहराती जा रही है.

निष्कर्ष

ऊपर बताई गईं बातों से साफ होता है कि कोविड-19 पर्सनल लोन के लिए फैसला लेने से पहले सावधानी बरतने की जरूरत है. हालांकि ब्याज दर कम है और यह असल में कोविड-19 के मुश्किल दौर में लोगों की मदद करने के लिए लाया गया है. लेकिन यह न भूलें कि अन्य लोन्स की तरह इस लोन पर भी ब्याज लगेगा और आपको ईएमआई चुकानी होगी. इसलिए सलाह दी जाती है कि इसे तभी चुनें, जब आपके पास कोई और विकल्प शेष न बचा हो.

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