क्या लंबी अवधि के लिए पर्सनल लोन लेना सही फैसला है?

Personal Loan

पैसों की तंगी के समय या फिर अपने सपनों को पूरा करने के लिए पर्सनल लोन बहुत काम आते हैं. कई बैंक, एनबीएफसी और डिजिटल कर्जदाता 10 हजार रुपये से 40 लाख रुपये तक का पर्सनल लोन देते हैं.

पर्सनल लोन से मिली राशि का इस्तेमाल आप किसी भी तरह से कर सकते हैं और इसकी भुगतान अवधि आमतौर पर 1 साल से 5 साल के बीच होती है. छोटी अवधि (1 से 3 साल) चुनें या फिर लंबी (3.5 से 5 साल) इस पर बहस हो सकती है. लेकिन सभी कर्जदाता आपकी चुकाने की क्षमता  के मुताबिक लोन की अवधि चुनने की आजादी देते हैं. इसलिए सही अवधि चुनने वक्त बेहद सावधानी बरतें.

लंबी अवधि के पर्सनल लोन के फायदे

भुगतान का बोझ घटा देता है

अगर आपका पहले से ही लोन चल रहा है और आप मासिक किस्त कम रखना चाहते हैं तो आपके लिए 4-5 वर्ष की अवधि सही रहेगी. जितनी लंबी अवधि होगी, उतनी ही कम ईएमआई होगी.

लोन एलिजिबिलिटी बढ़ती है

आपकी लोन एप्लिकेशन मंजूर करने से पहले कर्जदाता आपकी मासिक आय और अन्य क्राइटेरिया यह सुनिश्चित करने के लिए चेक करता है कि आप बिना किसी देरी से लोन चुका पाएंगे. जब आप लंबी अवधि चुनते हैं तो आपकी ईएमआई कम हो जाती है और कर्जदाता आपको बड़ी राशि बतौर लोन देता है क्योंकि लोन पेमेंट में चूक के चांस कम हो जाते हैं.

लोन प्री-क्लोजिंग

अधिकतर कर्जदाता 1-2 प्रतिशत की न्यूनतम फीस लेकर ग्राहकों को समय से पहले लोन बंद कराने की सुविधा देते हैं. लिहाजा, लंबी अवधि चुनने से न सिर्फ आप पैसे बचा पाएंगे बल्कि समय से पहले ही लोन फोरक्लोज भी करा सकते हैं.

क्रेडिट स्कोर बेहतर होगा

अगर आपका क्रेडिट स्कोर 750 से कम है और आप पर्सनल लोन के जरिए उसे बेहतर करना चाहते हैं तो लोन की लंबी अवधि आपके लिए सर्वश्रेष्ठ रहेगी. नियमित रूप और बिना देरी के भुगतान से आपका क्रेडिट स्कोर हर महीने बेहतर होगा.

आपको टॉप-अप लोन के योग्य बनाता है

लोन अवधि का एक निश्चित पीरियड पूरा करने के बाद कई कर्जदाता ग्राहकों को टॉप-अप लोन की सुविधा मुहैया कराते हैं. आमतौर पर, 12 ईएमआई चुकाने के बाद कोई ग्राहक पर्सनल लोन टॉप अप पाने के काबिल हो जाता है. अगर अवधि लंबी है तो आपके पास टॉप-अप के लिए योग्य होने के अधिक चांस हैं.

लंबी अवधि का पर्सनल लोन लेने के नुकसान

ऊंची ब्याज दरें

पर्सनल लोन में लंबी अवधि चुनने का सबसे बड़ा नुकसान है कि इसमें आपको ज्यादा ब्याज दरें चुकानी पड़ती हैं. कार और होम लोन की तुलना में पर्सनल लोन में ब्याज दरें ज्यादा होती हैं और अगर आप लंबे समय में ब्याज दरों को  देखें तो पाएंगे कि जितना आपने उधार लिया, उससे ज्यादा चुकाया है.

अधिक समय तक रहना होगा कर्जे में

जितनी लंबी अवधि होगी, उतने ही वक्त तक आपको कर्जे में रहना होगा. इसका मतलब है कि आप कर्ज के बोझ में रहेंगे और लंबे समय तक आपको भुगतान के प्रति अनुशासित रहना होगा.

नए लोन्स के लिए कम होगी योग्यता

किसी शख्स की लोन एलिजिबिलिटी उसकी भुगतान की क्षमता पर निर्भर करती है. अगर आपका पहले से ही लोन चल रहा है तो नए लोन के लिए आपकी एलिजिबिलिटी घट जाएगी क्योंकि कर्जदाता नया लोन मंजूर करने से पहले सुनिश्चित करेगा कि आपकी हर महीने की देयता कुल मासिक आय 50 प्रतिशत से ज्यादा न हो.

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