क्या पर्सनल लोन इंश्योरेंस पॉलिसी लेना सही फैसला है, जानिए

क्या है पर्सनल लोन इंश्योरेंस?

अगर आपका एक्सीडेंट हो जाता है, किसी अप्रिय स्थिति से गुजरते हैं या फिर आपकी नौकरी चली गई है और ईएमआई नहीं चुका पा रहे हैं तो लोन इंश्योरेंस आपकी कर्ज चुकाने में मदद कर सकता है. लोन लेते वक्त ही लोन इंश्योरेंस खरीदा जाता है. इसके लिए ग्राहक को एक बार में एकमुश्त राशि देनी पड़ती है या फिर वह मासिक ईएमआई चुका सकता है.

इंश्योरेंस की राशि कटने के बाद ही आवेदक को लोन की राशि मिलती है. लोन इंश्योरेंस इसलिए लिया जाता है क्योंकि अगर कोई अप्रिय स्थिति आती है तो परिवार के लोग इंश्योंरेस कंपनी से बात कर बैंक से कर्ज की राशि को खत्म करा सकते हैं. इससे लोन लेने वाले का परिवार लोन की ईएमआई भरने के बोझ से बच जाएगा.

पर्सनल लोन इंश्योरेंस के फायदे क्या हैं?

जब हम जीवन के मुश्किल दौर से गुजरते हैं तो लोन इंश्योरेंस बकाया ऋण की ईएमआई से निपटने में मदद करता है. पर्सनल लोन इंश्योरेंस मदद करता है-
– अगर आपकी नौकरी चली जाए.
– मौत, विकलांगता और गंभीर बीमारी में
– कई बैंक पर्सनल लोन इंश्योरेंस पॉलिसी में मनी बैक भी ऑफर करते हैं, जो ग्राहक को प्लान के खत्म होने पर मिलता है.
– कुछ लोन इंश्योरेंस पॉलिसियां 80सी के तहत आयकर में छूट भी दिलाती हैं.

अगर दुर्घटना हो जाए तो परिवार के लोग कर्ज भुगतान करने से बच जाते हैं. यह ग्राहक के आश्रितों के लिए ढाल का काम करता है.

जॉइंट लोन इंश्योरेंस आप अपने पार्टनर के साथ लेते हैं. यह संकट के समय आप और आपके पार्टनर को बचाता है. आप इस चीज को लेकर सुनिश्चित हो जाते हैं कि अगर कल.     कुछ हो भी गया तो लोन की पेमेंट्स पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

लोन इंश्योरेंस लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान: लोन इंश्योरेंस लेते वक्त काफी सतर्कता बरतें और इसकी अच्छे से समीक्षा करें.

– क्या दुर्घटना से मौत या किसी कारण से मृत्यु को पर्सनल लोन इंश्योरेंस कवर करता है? क्या स्थायी विकलांगता पर विचार किया जाएगा या फिर सिर्फ अस्थायी विकलांगता         को तवज्जो दी जाएगी.
– यह देखें कि प्रीमियम एक बार में चुकाना है या फिर मासिक किस्त के तौर पर.
– क्या इंश्योरेंस लेने से पहले मेडिकल चेकअप कराया जाएगा.
– इंश्योरेंस पॉलिसी की एलिजिबिलिटी चेक करें. क्या यह किसी भी राशि पर उपलब्ध है या एक निश्चित राशि पर.
– कुछ मामलों में, अगर लोन को दूसरे बैंक में ट्रांसफर किया जाता है तो लोन इंश्योरेंस खत्म हो जाता है. यह देख लें कि अगर दूसरे बैंक में लोन शिफ्ट होता है तो क्या इसे रिन्यू         कराना होगा.
– कुछ बैंक दोनों पार्टियों के लिए जॉइंट इंश्योरेंस पॉलिसीज देते हैं.

ऋण बीमा पॉलिसी लेने के लिए आपको क्या भुगतान करना होगा?

किसी भी अन्य इंश्योरेंस प्लान की तरह लोन इंश्योरेंस का भी प्रीमियम चुकाना पड़ेगा. प्रीमियम की राशि आवेदक की उम्र, स्वास्थ्य, लोन की राशि और अवधि हर कर्जदाता की अलग-अलग हो सकती है. कुछ ही ऐसे बैंक हैं, जो बिना प्रीमियम के इंश्योरेंस देते हैं.

– ज्यादा लोन राशि पर प्रीमियम भी ज्यादा होता है. ऐसे में बैंक की ज्यादा देयता भी होती है.
– इंसान की उम्र के कारण भी प्रीमियम कम ज्यादा हो सकता है. ज्यादा उम्र के लोगों के लिए प्रीमियम भी ज्यादा होती है.
– लोन की अवधि के मुताबिक, भुगतान की अवधि भी कम ज्यादा हो सकती है. ज्यादा अवधि के लिए प्रीमियम भी ज्यादा होती है.
– जिन लोगों की सेहत ठीक होती है, उनके लिए प्रीमियम बीमारियों वाले व्यक्तियों की तुलना में कम होगा.

विभिन्न प्रकार की इंश्योरेंस पॉलिसीज

होम लोन के विपरीत, बीमा कवर के लिए प्रीमियम राशि और अवधि कम है.

सिंगल एंड रेग्युलर प्रीमियम रिड्यूसिंग कवर: इस मामले में जैसे जैसे बकाया लोन की राशि घटती है, प्रीमियम की राशि भी घटती जाती है.
सिंगल एंड रेग्युलर प्रीमियम लेवल कवर: अगर बकाया लोन की राशि घटती है तो प्रीमियम की राशि वैसी ही रहती है.

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पर्सनल लोन इंश्योरेंस पॉलिसी के लिए इन फैक्टर्स पर विचार करें:

इंश्योरेंस ऑफर्स के फीचर्स की तुलना करें

अलग-अलग बैंक विभिन्न फायदों और खासियतों के साथ पर्सनल लोन ऑफर करते हैं. प्रीमियम की दरें भी अलग-अलग कंपनियों की अलग होती हैं.इसलिए इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने से पहले सभी विकल्पों की तुलना करना जरूरी है. कुछ कंपनियां पॉलिसी में नौकरी जाने को कवर नहीं करतीं. अगर आपको लगता है कि भविष्य में ऐसा हो सकता है तो आपको दूसरे विकल्पों पर गौर करना चाहिए.

नियम व शर्तों को समझें

पॉलिसी में लिखे नियम व शर्तों को ध्यान से पढ़ें, ताकि आखिरी समय पर कोई परेशानी न हो. यह आपको उन स्थितियों से बचने में मदद करेगा, जहां आप बीमा कवर का दावा नहीं कर पाएंगे.

अपने खर्चों को प्लान करें

चूंकि इंश्योरेंस पॉलिसी की लागत किस्तों में ही जुड़ जाएगी इसलिए आपको उसी के मुताबिक अपने खर्चों को प्लान करना होगा. लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव लाकर आप जेब पर बोझ से बच सकते हैं. अगर आपने लोन लेने की योजना बना ली है तो अप्रिय स्थितियों के कारण आपको कर्ज का बोझ अपने आश्रितों पर पड़ने नहीं देना चाहिए. इसलिए लोन इंश्योरेंस लेना एक समझदारी भरा कदम है.

इंश्योरेंस पॉलिसी लेने से पहले गहन रिसर्च करें

अकसर, बैंक इंश्योरेंस कवर के बारे में आखिर में बताते हैं, जो आपको अतिरिक्त खर्चा लगता है और आप होमवर्क भी नहीं कर पाते. कई मामलों में अगर आप तय अवधि से पहले लोन बंद कराना चाहते हैं तो उससे साथ इंश्योरेंस के फायदे भी खत्म हो जाते हैं. इसलिए सलाह दी जाती है कि यह पता कर लें कि आपको प्रीमियम भुगतान का रिफंड मिलेगा या ये खत्म हो जाएगा.

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