होम लोन अग्रीमेंट से जुड़ी कुछ खास बातें

क्या होता है होम लोन अग्रीमेंट

होम लोन अग्रीमेंट वो दस्तावेज होता है, जिस पर होम लोन के सारे नियम पर शर्तें लिखी होती हैं. ये नियम व शर्तें कर्जदाता तय करता है और ये लोन अग्रीमेंट साइन करने से आप कर्जदाता के सारे नियम व शर्तें मान लेते हैं और उनका पूरी लोन अवधि के दौरान पालन करते हैं.

होम लोन एग्रीमेंट में शामिल क्लॉज में ‘डिफॉल्ट्स’ भुगतान शामिल है और यह साफ तौर से आपके ऋण दायित्व को दर्शाता है. अकसर लोग इस दस्तावेज पर साइन करने को औपचारिकता मानते हैं, ताकि होम लोन हासिल कर सकें. लेकिन, यह औपचारिकता से कहीं ज्यादा है. अगर बिना इसे समझे आपने साइन कर दिया है तो भविष्य में परेशानी हो सकती है. एक बार लोन अग्रीमेंट साइन करने के बाद आपको सारे नियम और शर्तों का पालन करने के साथ-साथ उसमें शामिल वित्तीय जरूरतों को पूरा करना होगा. इसलिए होम लोन अग्रीमेंट पर सिर्फ एक औपचारिकता समझकर साइन न करें. उसे पहले ध्यान से जरूर पढ़ लें.

 

होम लोन अग्रीमेंट के अहम खंड

– जिस बैंक से होम लोन लिया है, उसे ग्राहक को हर साल अपनी इनकम की स्टेटमेंट भेजनी होगी.

– अगर ग्राहक रिटायर हो जाता है या फिर नौकरी से इस्तीफा दे देता है या फिर वीआरएस ले लेता है, ऐसे मामलों में, ग्राहक को जो भी पैसा कंपनी     से बतौर सेटलमेंट या फायदे के तौर पर मिलेगा, उससे ग्राहक को पहले होम लोन के बकाया को पूरा करना होगा. ये सेटलमेंट पूरा होने के बाद         बाकी बचे पैसे को ही ग्राहक अपनी निजी जरूरतों के लिए इस्तेमाल कर सकता है. अगर वह राशि होम लोन के बकाये को पूरा करने के लिए           काफी नहीं है तो यह कर्जदाता का फैसला होगा कि ग्राहक को कितना पैसा और चुकाना होगा.

– अगर ग्राहक अपनी नौकरी या कंपनी बदलता है तो उसे इस बारे में कर्जदाता को बताना होगा.

– कर्जदाताओं को पूरी लोन अवधि के दौरान भूकंप, आग, बाढ़ और धमाके इत्यादि जैसे जोखिमों से प्रॉपर्टी को सुनिश्चित करना होगा. इसे ढांचे का     इंश्योरेंस या फिर प्रॉपर्टी इंश्योरेंस भी कह सकते हैं.

– कई कर्जदाता लोन इंश्योरेंस की सलाह देते हैं और ये लोन अग्रीमेंट में भी शामिल होता है. इन बातों का खास ध्यान रखें और इसके बाद साइन         करें.

– आप लोन अवधि के दौरान  बिना कर्जदाता को बताए प्रॉपर्टी को रेंट पर नहीं दे सकते.

– लोन अवधि के दौरान कर्जदाता को यह हक है कि वह आपसे पूछे बिना कभी भी प्रॉपर्टी का निरीक्षण कर सकता है.

– लोन अग्रीमेंट में पेनाल्टी से जुड़े नियम स्पष्ट होने चाहिए कि चूक होने पर आपसे कितना चार्ज लिया जाएगा.

– प्रीपेमेंट और पार्ट पेमेंट नियम चेक करना भी बहुत जरूरी है. अलग-अलग कर्जदाताओं के अलग-अलग नियम होते हैं. कुछ कर्जदाता किसी बात    की अनुमति देते हैं, कुछ नहीं देते. अगर अनुमति है तो शुल्क के बारे में आपको मालूम होना चाहिए कि यह आप पर कितना बोझ डालेगा.

– अपने ब्याज दर का प्रकार जरूर चेक कर लें क्योंकि ज्यादातर कर्जदाता फिक्स्ड और फ्लोटिंग ब्याज दर देते हैं. अगर आपने फ्लोटिंग ब्याज दर         चुनी है तो आपकी ईएमआई वक्त-वक्त पर घटती या बढ़ती रहेगी. अपने होम लोन अग्रीमेंट में विचार करने वाली यह जरूरी बात है.

– लोन की अवधि के दौरान ग्राहक को प्रॉपर्टी बेचने या लीज पर देने का अधिकार नहीं है. अगर ग्राहक के लिए ऐसा करना जरूरी है तो उसे पहले       कर्जदाता से इजाजत लेनी होगी.

– जिस प्रॉपर्टी के लिए आपने होम लोन लिया है उसमें आप कुछ बदलाव करना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको कर्जदाता को बताना होगा.

– बिना लोन चुकाए ग्राहक भारत नहीं छोड़ सकता. ट्रैवल के लिए ठीक है लेकिन नौकरी या बिजनेस के लिए नहीं.

– होम लोन की अवधि के बारे में श्योर रहें. होम लोन लंबी अवधि का ही होता है और ग्राहक और कर्जदाता के बीच जरा सी गड़बड़ी आपकी सारी       प्लानिंग बिगाड़ सकती है. इसलिए लोन अग्रीमेंट पर यह बात जरूर चेक कर लें.

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