लोन और क्रेडिट कार्ड के खर्चों को बेहतर तरीके से कैसे मैनेज करें?

क्रेडिट कार्ड पैसे उधार लेने का सबसे आसान तरीका है. लेकिन सबसे खास बात जो उसके साथ जुड़ी है, वो है कि आप कैसे अपने क्रेडिट कार्ड के खर्चों को मैनेज कर सकते हैं.

जब आप क्रेडिट कार्ड्स और लोन को सही तरीके से मैनेज करते हैं तो यह वरदान बन जाता है. लेकिन जब मैनेज ठीक तरीके से नहीं होता तो आपके कर्जे नियंत्रण के बाहर हो जाते हैं. ऐसा तब हो सकता है जब आप अपनी बकाया राशि का भुगतान पूरी ब्याज अवधि के अंत से पहले या उससे पहले नहीं कर रहे हैं. यही बात लोन के मामले में भी चलती है. अगर इसे सही तरह से मैनेज और इस्तेमाल किया जाए  तो यह कमाल कर सकता है लेकिन अगर सही प्रबंधन नहीं किया तो कर्ज के मकड़जाल से बाहर आना मुश्किल हो जाएगा.

अगर पैसों के प्रबंधन के मामले में आपका कौशल अच्छा है तो क्रेडिट कार्ड्स और लोन को मैनेज करना बहुत आसान हो जाएगा. आइए आपको कुछ टिप्स बताते हैं, जिससे आप क्रेडिट कार्ड्स और लोन्स को अच्छी तरह से मैनेज कर फाइनेंशियल लाइफ आसान बना सकते हैं.

लोन और क्रेडिट कार्ड के खर्चों को मैनेज करने के टिप्स

अपने खर्चों पर नजर रखें

अपने खर्चों पर नजर रखना हमेशा अच्छी आदत होती है. इस तरह से, आपको पता चलेगा कि आखिर पैसा कहां खर्च हो रहा है लिहाजा आप अपने खर्चे उसी तरह से मैनेज कर सकते हैं. अपने खर्चों पर नजर रखकर आप खाते से जरूरत से ज्यादा पैसे निकालने से बच सकते हैं.

एक प्लान बनाएं

हर चीज के लिए प्लानिंग करें, चाहे वो स्टडीज हो, फ्यूचर हो या फिर पैसा. अगर यह पैसे के बारे में है तो मासिक बजट बनाकर आप इसे शुरू कर सकते हैं. इसी में अपने सारे खर्चे शामिल कर लें और अपने बजट को नजरअंदाज न करें क्योंकि यह बहुत जरूरी है. जब आप बजट बना लें तो अब समय है अपने लोन और क्रेडिट कार्ड्स के पुनर्भुगतान को प्लान करने का. आपकी प्लानिंग में स्टेप्स और फाइनेंशियल मैनेजमेंट शामिल होने चाहिए ताकि आप कर्ज को जल्द से जल्द लौटा सकें.

अपने क्रेडिट कार्ड के खर्च पर नजर रखें

आपके क्रेडिट कार्ड की समरी में क्रेडिट कार्ड से की गईं सभी खरीद और मासिक खर्चे शामिल होते हैं. लिहाजा हर महीने अपनी क्रेडिट कार्ड की स्टेटमेंट चेक करने से आप जान पाएंगे कि पैसे कहां खर्च किए हैं. इस तरीके से आप जान पाएंगे कि क्या आपको खर्चे कम करने की जरूरत है या फिर उसमें कुछ जोड़ा जा सकता है. यहां जरूरी बात यह जानना है कि आपने कार्ड से कौन की जरूरत की चीजें और कौन सी गैर-जरूरी खरीद की. इससे आपको भविष्य में निश्चित रूप से गैर-जरूरी खरीद को नजरअंदाज करने में मदद मिलेगी.

लोन लेने से पहले कैलकुलेशन करें

हालांकि कुछ जरूरतें ऐसी होती हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. लेकिन फिर भी कोई लोन लेने से पहले आपको कैलकुलेशन कर लेनी चाहिए. इस कैलकुलेशन में आपको कितना लोन लेना है, इस पैसे का इस्तेमाल और सबसे अहम आप कैसे इस पैसे को पास चुकाएंगे, शामिल होता है. आप सही नतीजे पाने और गलतियों से बचने के लिए ईएमआई कैलकुलेटर का भी यूज कर सकते हैं.

अपने ऋणों- क्रेडिट कार्ड, लोन्स और मार्गेज को प्राथमिकता दें

चाहे या ना चाहे, वक्त के किसी मोड़ पर आप कर्जों में जरूर फंस जाएंगे. लेकिन कर्ज के बोझ तले रहना कभी अच्छा नहीं होता और आपको इसे जल्द से जल्द खत्म करने की कोशिश करनी चाहिए. अपना कर्ज खत्म करने की ओर पहला कदम है उन्हें प्राथमिकता देना.

मान लीजिए कि आपका क्रेडिट कार्ड का बिल है, पर्सनल लोन है और होम लोन भी. आपका पहला कदम है कि इन कर्जों को प्राथमिकता दें. इसे करने के लिए आप हर लोन की कुल देय राशि को ईएमआई कैलकुलेटर के जरिए कैलकुलेट कर सकते हैं. सबसे ज्यादा प्राथमिकता उसे दें, जिसकी ब्याज दरें सबसे ज्यादा हैं. प्रॉयोरिटी लोन को लेकर सेविंग्स करनी शुरू कर दें और उन्हें समय से पहले ही क्लोज कर दें. इस तरीके से आप कुछ पैसे बचा सकते हैं, जो शायद आप ब्याज चुकाने में खर्च करते.

क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन को अपनी पहली प्राथमिकता रखें

हर शख्स की प्राथमिकताएं अलग-अलग होती हैं. कई लोग पहले मॉर्गेज से छुटकारा पाना चाहते हैं जबकि कुछ ज्यादा ब्याज वाले कर्ज से. लेकिन फैक्ट यह है कि क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन की ब्याज दरों की तुलना में मॉर्गेज लोन में ब्याज दर कम है. साथ ही मॉर्गेज लोन ज्यादा राशि वाला लोन होता है, जिसे चुकाने में लंबा समय लगता है. इसलिए जब बात प्राथमिकता समझदारी से चुनने की हो तो पहले अपना क्रेडिट कार्ड का कर्ज चुकाएं, फिर पर्सनल लोन्स का फिर मॉर्गेज लोन.

सेविंग्स करते रहें

हर महीने अपनी मासिक आय से सेविंग्स करने से अच्छी वित्तीय आदतें पैदा होती हैं. अपनी सेविंग्स को श्रेणियों में बांट लें और फिर आय में से प्रतिशत के आधार पर सेविंग्स करें. इसे ऐसे किया जा सकता है- इमरजेंसी फंड के लिए इनकम में से 10 प्रतिशत बचाएं. फिर इन्वेस्टमेंट के लिए और फिर कर्ज को चुकाने के लिए. जब अच्छी खासी सेविंग्स हो जाए तो मौजूदा ऋणों को फोरक्लोज कर दें. जब आप निवेश कर रहे हों तो टैक्स सेविंग इन्वेस्टमेंट प्लान को चुनें. इससे आपका कुछ पैसा बचेगा और भविष्य में आपको मुनाफा कमाकर देगा.

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