एक्सपर्ट की तरह मैनेज करें अपना होम लोन, अपनाएं ये स्मार्ट टिप्स

नए घर के फाइनेंस के लिए होम लोन एक शानदार और आसान विकल्प है लेकिन होम लोन को मैनेज करना उतना आसान नहीं है, जितना आपको लगता है. होम लोन की अवधि लंबी होती है इसलिए आप लंबे समय तक इससे जुड़ जाते हैं. होम लोन की अवधि अधिकतम 30 साल तक हो सकती है. इसका मतलब है कि आपको 30 साल तक ईएमआई चुकानी होगी और यह कोई आसान काम नहीं है.

होम लोन को मैनेज करने के स्मार्ट टिप्स

अपने फाइनेंस मैनेज करें

किसी भी लोन या इन्वेस्टमेंट को लेकर आपका पहला मकसद यह होना चाहिए कि आप अपना बजट मैनेज करें और कैश फ्लो को बढ़ाएं. इसे पाने के लिए आप मासिक बजट बनाएं और उस पर पूरे महीने टिके रहें. इससे आप अपनी मासिक आय और खर्चे पर नजर रख पाएंगे. अपने निवेश पर मासिक रिटर्न के साथ-साथ अपनी मासिक पेमेंट्स को भी शामिल कर लें, जो आपके फंड का आउटफ्लो है.

ज्यादा ईएमआई चुकाएं

आप जितने युवा होंगे, जिम्मेदारियों का बोझ उतना कम होगा और यही कारण है कि एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि युवावस्था में ही आपको घर खरीद लेना चाहिए. यह ऐसा वक्त होता है, जब आपको पैसों की कोई दिक्कत नहीं होती और जिंदगी भी आराम से चल रही होती है. ऐसे में आप होम लोन की ज्यादा ईएमआई भी दे सकते हैं. इससे सामान्य अवधि की तुलना में आप पर थोड़े समय में लोन का बोझ कम हो जाएगा. इससे आप ब्याज पर भी बचत कर पाएंगे. चाहे आप युवा हों या ना हों, आपका पहला मकसद किसी भी हाल में यही होगा कि कैसे जल्द से जल्द कर्ज को कम किया जा सके. अगर आपके पास पैसा आ रहा है तो उसे ऐशो-आराम पर उड़ाने की जगह अपनी ईएमआई बढ़वा लें.

ज्यादा डाउन पेमेंट दें

अगर आपके अकाउंट में अच्छी-खासी सेविंग्स हैं या फिर निवेश से ज्यादा रिटर्न नहीं मिल पा रहा है तो यही सही समय है उसे इस्तेमाल करने का. जो होम लोन की राशि आपको मिलेगी, वह घर खरीदने के लिए पर्याप्त नहीं होगी आपको अपनी जेब से भी कुछ राशि देनी होगी, जिसे डाउन पेमेंट कहा जाता है. आमतौर पर आपके घर की कुल लागत का 20-30 प्रतिशत डाउन पेमेंट अमाउंट होता है. अगर आपके पास पर्याप्त पैसे हैं या फिर आप अरेंज कर सकते हैं तो बेहतर होगा कि आप ज्यादा डाउन पेमेंट चुकाएं. इससे आपके लोन की अवधि भी कम हो जाएगी. दोनों की मामलों में यह आपके लिए फायदेमंद है. चाहे कम ईएमआई हो या फिर कम अवधि दोनों से ही आपके पैसे बचेंगे और जेब पर बोझ भी कम हो जाएगा. इससे आप अपना लोन जल्दी चुका पाएंगे और ज्यादा ब्याज भी नहीं देना पड़ेगा.

कम ब्याज दरों पर बैलेंस ट्रांसफर

डायवर्सिफायड इंट्रस्ट रेट रीसेड पीरियड की वजह से कर्जदाताओं ने अपने ब्याज दर कई गुना कम कर दिए हैं. ऐसा भी हो सकता है कि आपने ज्यादा ब्याज दरों पर होम लोन ले रखा हो और बाद में आपको पता चले कि अन्य कर्जदाता कम दरों पर होम लोन दे रहे हैं. ऐसे बैंक जो कम ब्याज दर दे रहे हैं उन्हें चुनकर आप काफी पैसा बचा सकते हैं. आप बैंकों के बैलेंस ट्रांसफर स्कीम के जरिए इसका फायदा उठा सकते हैं.

बैलेंस ट्रांसफर के तहत आपके होम लोन की मूल राशि (प्रिंसिपल अमाउंट) का बकाया दूसरे बैंक में ट्रांसफर कर दिया जाता है. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि ब्याज दरें कम हो जाएं. लेकिन बैलेंस ट्रांसफर करने से पहले यह जरूर देख लें कि ब्याज में मामूली फर्क पर ही तो आप ऐसा नहीं कर रहे. कई बैंक स्विच करने पर चार्जेज भी लगाते हैं.  इसलिए सुनिश्चित कर लें कि बैलेंस ट्रांसफर करते हुए आप पेनाल्टी से ज्यादा सेविंग्स करें. बैलेंस ट्रांसफर के लिए, आपको लोन अप्रेजल और पेपरवर्क के अलावा विभिन्न प्रक्रियाओं से दोबारा गुजरना होगा.

आंशिक पूर्व भुगतान की कोशिश करें

लोन राशि भुगतान करने में आप जितनी देरी करेंगे, उतना ज्यादा ब्याज चुकाना होगा. इसलिए समय से पहले थोड़ा भुगतान एक तेज तरीका है, जिससे आप अपनी लोन अवधि कम कर सकते हैं. आंशिक भुगतान के कई फायदे हैं. पहला, बैंक इस सुविधा के लिए कोई पैसा नहीं लेते और प्री-पेमेंट अमाउंट 10 हजार रुपये से भी कम होता है. एक बड़ा बोनस, शेयरों और उस पर मिला बड़ा लाभ, बेची गई संपत्ति से आय, टैक्स सेविंग इन्वेस्टमेंट, मैच्योर हो रहा फिक्स्ड डिपॉजिट, माता-पिता या परिवार से मिले तोहफे, किराये की आय या फिर वन टाइम इनकम को आंशिक पूर्व भुगतान के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.

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