अपने स्टार्टअप बिजनेस के लिए कैसे जुटाएं फंड, जानिए?

Startup Business Fund

बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं? आपके पास शानदार आइडिया है. आपके पास सामर्थ्य भी है और जानते हैं कि आप ऐसा कर भी कर सकते हैं. क्या कभी अपने सपने पूरे करने के लिए पूंजी या फंडिंग के बारे में सोचा है. कोई भी बिजनेस शुरू करने से पहले पूंजी की जरूरत पड़ती है. चाहे वह किसी भी प्रकार का सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग स्टार्टअप हो या फिर बड़ा उद्योग. फंडिंग आपके बिजनेस को मजबूत नींव देता है और उसे विस्तार करने और विकास देने में मदद करता है. स्टार्टअप बिजनेस के लिए फंड ढूंढना कई बार थकाऊ और चुनौतीपूर्ण काम है. लेकिन आपके लिए इसे आसान बनाने के लिए, हम कुछ वित्तीय तकनीकों को लेकर आए हैं, जिससे आपके लिए फंडिंग ढूंढना आसान हो जाएगा.

स्टार्टअप को खुद फाइनेंस करें

सेल्फ फाइनेंसिंग या पर्सनल इन्वेस्टमेंट कई बिजनेस स्टार्टअप्स द्वारा इस्तेमाल किया गया सर्वश्रेष्ठ तरीका है. जब आप लोन लेते हैं या फिर सरकारी बैंक, किसी संस्थान से स्टार्टअप के लिए फंड मांगते हैं तो उनके पास आपके लिए एक सवाल होगा कि स्टार्टअप के लिए आप कितना पैसा खर्च करेंगे? पहली बार बिजनेस शुरू करने वालों के लिए अपनी सेविंग्स को निवेश करना सबसे बेहतरीन विकल्प है. बिजनेस के बाकी चरणों में आप आसानी से बिजनेस लोन को चुन सकते हैं और कर्जदाताओं के पास मना करने के लिए कोई विकल्प भी नहीं बचेगा क्योंकि वे बिजनेस की स्थिरता पर विचार करेंगे और उनके लिए जोखिम भी कम रहेगा.

एंजल इन्वेस्टर खोजना

जिन लोगों के पास सरप्लस कैश होता है, उसे एंजल इन्वेस्टर्स कहते हैं और ये लोग भारत और पूरी दुनिया के नए स्टार्टअप्स में निवेश करने में दिलचस्पी दिखाते हैं. एंजल इन्वेस्टर्स द्वारा इन्वेस्टमेंट में जोखिम वित्तीय संस्थानों की तुलना में बहुत ज्यादा होता है. वो इसलिए क्योंकि एंजल इन्वेस्टर्स ज्यादा रिटर्न्स पाने के लिए निवेश करते हैं. भारत में मशहूर एंजल इन्वेस्टर्स हैं- मुंबई एंजल्स, इंडियन एंजल नेटवर्क और हैदराबाद एंजल्स. फंडिंग सपोर्ट के लिए स्टार्टअप ओनर्स सीधे इन निवेशकों से संपर्क कर सकते हैं.

क्राउडफंडिंग सपोर्ट

क्राउडफंडिंग बिजनेस के विभिन्न कामों के लिए सोशल नेटवर्किंग और वेब बेस्ड प्लेटफॉर्म के जरिए कई निवेशकों से फंड्स पाने का एक तरीका है. ऑनलाइन क्राउडफंडिंग वेब पोर्टल्स विभिन्न मकसदों जैसे समाजसेवी कार्यों, चैरिटी, आइडियाज, आपदा, इवेंट्स इत्यादि के लिए फंड्स जुटाते हैं. यह क़ॉन्सेप्ट या आइडिया स्टार्टअप व पहली बार बिजनेस शुरू कर रहे लोगों के लिए फंड जुटाने और उसे सोशल व कल्चरल कारणों के लिए प्रमोट भी करता है. भारत में मशहूर क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म्स हैं- किकस्टार्टर, कीटो, काटापूल्ट, फ्लूलएड्रीम, फंडेबल, इंडीगोगो, मिलाप और विशबेरी.

सरकारी स्कीमों के तहत लोन

भारत सरकार ने स्टार्टअप एंटरप्राइजेज, एसएमई, एमएसएमई, ग्रामीण महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक विकास, महिला एंटरप्रेन्योर, पढ़े-लिखे युवाओं, एससी/एसटी श्रेणी के लोग, छोटे उद्यम, ग्रामीण, शहरी और ग्रामीण इलाकों में रह रहे लोगों के लिए कई स्कीमें लॉन्च की हैं. भारत सरकार द्वारा लॉन्च की गई स्कीमें हैं प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के तहत MUDRA लोन स्कीम, स्टार्टअप इंडिया, क्रेडिट गारंटी ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (CGTMSE), स्टैंप अप इंडिया, अटल इनोवेशन मिशन, मेक इन इंडिया, ट्रेड रिलेटेड एंटरप्रेन्योरशिप असिस्टेंस एंड डेवेलपमेंट (THREAD) इत्यादि.

बैंकों से लोन

स्टार्टअप बिजनेस के लिए बैंक सबसे पहली प्राथमिकता माने जाते हैं क्योंकि पैसे पाने के लिए उन्हें विश्वसनीय और आसान तरीका माना जाता है. बैंक दो तरह से स्टार्टअप एंटरप्राइजेज को लोन देते हैं- टर्म लोन और वर्किंग कैपिटल लोन. आमतौर पर हर पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर बैंक स्टार्टअप के लिए बिजनेस लोन्स देता है. हालांकि ब्याज दरें, लोन राशि और भुगतान की अवधि हर बैंक में अलग-अलग होती हैं.

एनबीएफसी-एमएफआई से छोटे बिजनेस लोन

अगर आप उधार लेने में नए हैं और न तो कोई फाइनेंशियल हिस्ट्री है और न ही कोई क्रेडिट स्कोर तो आपको प्राइवेट या पब्लिक सेक्टर के बैंक से लोन मिलना मुश्किल हो सकता है. नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज (NBFCs) और माइक्रो फाइनेंस इंस्टिट्यूशन्स (MFIs) से संपर्क कर आपको अपनी जरूरतों के आधार पर स्टार्टअप्स के लिए बिजनेस लोन मिल जाएगा, वो भी बिना क्रेडिट स्कोर और फाइनेंशियल हिस्ट्री के. एनबीएफसी और एमएफआई जो ब्याज दरें ऑफर करते हैं, वे बैंकों की तुलना में ज्यादा होती हैं.

बिजनेस क्रेडिट कार्ड्स

हाल के वर्षों में स्टार्टअप एंटरप्राइजेज के उभरने के कारण क्रेडिट कार्ड फॉर बिजनेस ने काफी रफ्तार पकड़ी है. अगर शुरुआती चरण में आपके बिजनेस को ज्यादा बड़ी राशि की जरूरत नहीं है तो आप लेनदेन के लिए क्रेडिट कार्ड्स का इस्तेमाल कर सकते हैं और पेनाल्टी या अतिरिक्त शुल्क से बचने के लिए आप वक्त पर भुगतान करें.

पीयर-टू-पीयर लेंडिंग

पीयर-टू-पीयर लेंडिंग एक तरह का कर्ज है, जिसकी पूरी प्रक्रिया में  कोई बिचौलिया शामिल नहीं होता है. कर्जदाता अपने निवेश के रूप में ग्राहकों को पैसा उधार देते हैं ताकि वे स्टार्टअप में पैसा खर्च कर सकें. इस प्रक्रिया में कर्जदाता ग्राहकों से पैसा कमाते हैं. क्योंकि उनकी ब्याज दरें बैंक, एमएफआई और एनबीएफसी की तुलना में ज्यादा होती हैं. पीयर-टू-पीयर लेंडिंग इंस्टिट्यूशन्स को ग्राहकों और कर्जदाताओं की बेहतरी के लिए आरबीआई रेग्युलेट करता है. स्टार्टअप एंटरप्राइज के लिए पीयर-टू-पीयर लेंडिंग एक तरह का लोन है, जहां कर्जदाताओं के लिए यह एक निवेश बन जाता है.

तो आपके पास यह सब है. स्टार्टअप बिजनेस के लिए वित्तीय तकनीक है. बताई गईं सभी तकनीकों में कोई एक तो आपको फंड पाने में मदद जरूर करेगी. जूते घिसने वाली सभी प्रक्रियाओं के लिए तैयार रहें और उपलब्ध विकल्पों में से सर्वश्रेष्ठ चुनें.

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