होम लोन ब्याज दर में बढ़ोतरी से निपटना है तो अपनाएं ये आसान टिप्स

रेपो रेट में बढ़ोतरी से ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?

RBI द्वारा रेपो रेट बढ़ाए जाने से सबसे ज्यादा ग्राहकों को ही झेलना होगा. 50 बेसिस पॉइंट्स बढ़ने से MCLR से जुड़े जितने भी लोन हैं उनके ब्याज में इजाफा हो जाएगा. इसका मतलब है कि जिन ग्राहकों के लोन फ्लोटिंग ब्याज दर पर चल रहे हैं, उन्हें ज्यादा ब्याज चुकाना होगा. जितने भी होम लोन MCLR से जुड़े हुए हैं, उन्हें भी बढ़ा हुआ ब्याज देना होगा और इससे उनकी जेब पर काफी असर पड़ेगा.

ब्याज दर में बढ़ोतरी से ग्राहकों पर तुरंत कोई असर नहीं पड़ेगा. इन दिनों कर्जदाता ईएमआई की राशि नहीं बढ़ाते, वे अवधि बढ़ा देते हैं. इस सिस्टम की वजह से ग्राहक को असर पता नहीं चलता लेकिन अगर कैलकुलेशन करेंगे तो पाएंगे कि ब्याज दर में बढ़ोतरी से आपकी जेब पर कितना बोझ पड़ रहा है.

बढ़ी हुए ब्याज दर से कैसे निपटें

0.5 प्रतिशत ब्याज दर की बढ़ोतरी के कारण मौजूदा होम लोन ग्राहकों को काफी बड़ी राशि चुकानी पड़ती है. लेकिन अगर कुछ स्मार्ट टिप्स अपनाए जाएं तो आप लोन भुगतान में काफी पैसा बचा सकते हैं. ब्याज कम करने के लिए अपनाएं ये टिप्स:

लोन रीफाइनेंसिंग कर सकता है बड़ी मदद

मौजूदा कर्जदाता को छोड़कर किसी दूसरे कर्जदाता के पास चले जाने से आपकी परेशानी कम हो सकती है. हम जानते हैं कि रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ गया है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सभी कर्जदाता अपनी ब्याज दर 0.25 प्रतिशत बढ़ा देंगे. कुछ कर्जदाता अपनी MCLR 0.25 प्रतिशत से ज्यादा भी बढ़ा देते हैं. अगर आपका कर्जदाता भी इन्हीं में से एक है तो कर्जदाता बदलना ही आपके लिए सही है. तकनीकी भाषा में कर्जदाता बदलने को होम लोन बैलेंस ट्रांसफर कहा जाता है. ईएमआई पेमेंट के 18 महीने पूरे होने के बाद आप होम लोन बैलेंस ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं. लोन स्विच करने से पहले विभिन्न कर्जदाताओं के होम लोन ब्याज दरों की तुलना जरूर कर लें. अगर ब्याज दर में एक प्रतिशत की भी गिरावट होती है तो आप अवधि के अंत में काफी राशि बचा लेंगे.

ईएमआई बढ़ाएं अवधि नहीं

ऐसी स्थितियों में हाउसिंग लोन के ब्याज को कम करने का यह जमीनी नियम है. बैंक कंपाउंड इंट्रस्ट रेट पर क्रेडिट इंट्रस्ट रेट लगाता है. इसका मतलब है कि कम की तुलना में लंबी लोन अवधि उसी राशि पर ग्राहक को ज्यादा महंगी पड़ेगी. जैसा ऊपर बताया गया रेपो रेट में बढ़ोतरी से ग्राहक की ईएमआई पर तुरंत कोई असर नहीं पड़ेगा लेकिन लोन की अवधि बढ़ा दी जाएगी. ऐसे मामले में अगर आप ब्याज को कम करना चाहते हैं तो आप अपने कर्जदाता से लोन की अवधि बढ़ाने की बजाय ईएमआई में इजाफा करने का अग्रीमेंट कर सकते हैं. ईएमआई बढ़वाने से आप ब्याज भुगतान पर बड़ी राशि बचा सकते हैं.

जहां मुमकिन हो, लोन का आंशिक भुगतान करें

आंशिक भुगतान यानी पार्ट पेमेंट. यह उधार ली गई राशि को कम करने में मदद करता है. कई फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स यह सलाह देते हैं कि अपना अतिरिक्त पैसा कम रिटर्न में निवेश करने की जगह, अपना लोन चुका दें. ब्याज अदायगी पर जो सेविंग्स आप करेंगे, वो आपके निवेश के रिटर्न से ज्यादा होगी. होम प्रीपेमेंट ग्राहक पर कई प्रभाव डालता है. होम लोन के प्रीपेमेंट के जरिए आप अवधि को कम कर सकते हैं. कम अवधि होने से आप वक्त से पहले ही कर्जमुक्त हो जाएंगे. अगर लोन अवधि की शुरुआत में प्रीपेमेंट किया जाए तो यह बहुत अच्छे रिजल्ट देता है. लेकिन ध्यान रहे कि पार्ट पेमेंट से ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं आता लेकिन अवधि के घट जाने से ब्याज का भुगतान कम हो जाता है.

4 साल के बाद रेपो रेट में इजाफा किया गया है. रेपो दर में इजाफे के लिए पैसे की मुद्रास्फीति अहम कारण है और यह काफी हद तक निश्चित है कि यह भविष्य में भी बढ़ेगा या घटेगा. हम ग्राहक यही कर सकते हैं कि छोटे-छोटे कदम उठाकर उधार की लागत कम कर लें.

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