ब्याज दरों के ढांचे के आधार पर पर्सनल लोन के लिए कैसे चुनें कर्जदाता

पर्सनल लोन

पर्सनल लोन एक असुरक्षित लोन है, जिसे ऑनलाइन हासिल करना बेहद आसान है. पर्सनल लोन की सबसे अच्छी बात है कि आपको इसे लेने के एवज में कोई सिक्योरिटी नहीं देनी पड़ती. पर्सनल लोन ऑनलाइन प्रोसेसिंग के लिए तुरंत अप्रूव होता है, जो इसे इंस्टेंट बनाता है.

पर्सनल लोन का एक बड़ा फायदा है कि आपको जो पैसा मिलता है, जो आप कहीं भी खर्च कर सकते हैं. होम लोन या बिजनेस लोन की तरह इसमें सीमाएं तय नहीं हैं. इसका मतलब है कि आप अपनी वित्तीय जरूरतें- परिवार में शादी या इमरजेंसी में कर सकते हैं.

फिनटेक कंपनियों ने पर्सनल लोन की मंजूरी प्रक्रिया को ग्राहकों के लिए काफी आसान और झंझट रहित बना दिया है. लेकिन पर्सनल लोन लेने के कारण अलग-अलग हो सकते हैं. कोई भी शख्स ज्यादा ब्याज दर पर लोन लेना नहीं चाहता. यही हाल पर्सनल लोन के साथ है. ब्याज दरें हर कर्जदाता की अलग-अलग होती हैं. कम दरों पर पर्सनल लोन पाने के लिए आपको विभिन्न कर्जदाताओं के ब्याज दरों की तुलना करने पड़ेगी. लेकिन रिसर्च शुरू करने से पहले जो बात आपके लिए जान लेना जरूरी है, वो है पर्सनल लोन की ब्याज दर का ढांचा.

पर्सनल लोन में विभिन्न प्रकार के ब्याज दर ढांचे

फ्लैट रेट स्ट्रक्चर

जब आप पर्सनल लोन के फ्लैट रेट स्ट्रक्चर को चुनते हैं तो लोन पर ब्याज पूरी अवधि में एक समान रहता है. फ्लैट रेट में, ब्याज पूरी मूल राशि और उसके साथ सालाना ब्याज दर पर कैलकुलेट होता है.

फ्लैट रेट स्ट्रक्चर में, ब्याज दर को कुल लोन राशि और अवधि के साथ गुणा किया जाता है ताकि ब्याज के रूप में भुगतान की गई कुल राशि पता चल सके. इसलिए, आपके उधार के लिए भुगतान की जाने वाली ब्याज राशि यहां पूर्व निर्धारित है.

कुल भुगतान की जाने वाली राशि इस आसान फॉर्म्युला से कैलकुलेट होती है: P+ (P*R*T)/100= A.

जहां

पी है उधार ली गई राशि

आर है ब्याज दर

टी है लोन की अवधि (वर्षों में) और

ए है कुल राशि जो चुकाई जानी है.

आइए इसे एक उदाहरण से समझते हैं- आपने 1 लाख रुपये का लोन दो साल की अवधि के लिए 10 प्रतिशत की सालाना ब्याज दर पर लिया है.

यहां ब्याज को ऐसे कैलकुलेट किया जाएगा:

1,00,000+ (1, 00,000*10*2)/100 = 1, 20,000)

यहां आपको जो कुल राशि वापस चुकानी होगी, वो है 1,20,000. ये 20 हजार ब्याज की राशि है.

रिड्यूसिंग बैलेंस मेथड

रिड्यूसिंग बैलेंस इंट्रस्ट रेट को कारगर ब्याज दर भी कहा जाता है. इस मेथड में लोन का ब्याज बकाया लोन राशि पर कैलकुलेट किया जाता है, जो पिछली कटौतियों के बाद बचता है.

यानी इस तरीके में ब्याज की राशि घटती चली जाती है. रिड्यूसिंग इंट्रस्ट रेट पर लोन लेना काफी फायदेमंद माना जाता है क्योंकि कुल ब्याज लागत वक्त के साथ घटती जाती है और ग्राहक पर बोझ भी कम हो जाता है.

आइए इसे एक उदाहरण से समझते हैं:

आपने 3 लाख रुपये का लोन 12 प्रतिशत की ब्याज दर पर 2 साल के लिए लिया.

यहां पहले महीने की ईएमआई होगी 16 हजार रुपये, जिसमें से प्रिंसिपल रीपेमेंट है 9000 रुपये और शेष ब्याज है.

यहां अगले महीने के लिए कैलकुलेट किया गया ब्याज कुल राशि पर नहीं होगा, जो उधार ली गई थी. अगले महीने ब्याज मूल राशि पर लगेगा- पिछली ईएमआई में भुगतान की गई मूल राशि का कंपोनेंट. इसका मतलब है कि ब्याज 3 लाख- 16 हजार= 2,84,000 रुपये.

इसका मतलब है कि आगामी महीने के लिए आपके लोन पर ब्याज कुल लोन राशि से भुगतान की गई पहली मासिक किस्त को कम करके निर्धारित किया जाएगा.

इन दो ब्याज दरों के ढांचों को ध्यान में रखकर आप कर्जदाता से अपनी जरूरत के हिसाब से पर्सनल लोन ले सकते हैं.

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