कैसे पूंजी जुटाने के लिए छोटे व्यापार बिजनेस फंडिंग का इस्तेमाल कर सकते हैं

Business Funding

शुरुआत, विस्तार और बिजनेस में निवेश अवसरों, जोखिम और परेशानियों के साथ आते हैं. छोटे व्यापार के सामने बिजनेस को सुचारू रूप से चलाने के लिए पर्याप्त पूंजी जमा करने की चिंता होती है. किसी भी बिजनेस का शुरुआती चरण अहम होता है और उसे आगे बढ़ाने और मार्केट में गति हासिल करने के लिए तुरंत बिजनेस फंडिंग की जरूरत पड़ती है. ऐसे लोन्स पर ब्याज दर विभिन्न फैक्टर्स जैसे कर्ज देने वाले संस्थान, बिजनेस के प्रकार, क्रेडिट रेटिंग, मार्केट ट्रेंड्स और कितनी राशि के लोन के लिए अप्लाई किया है, इत्यादि पर निर्भर करता है. ये लोन छोटी से लेकर बड़ी अवधि तक होते हैं और अगर बिजनेस निश्चित समय सीमा के भीतर रकम चुकाने की स्थिति में है तो एक अवधि के बाद इन्हें रिन्यू कराया जा सकता है. आइए आपको छोटे बिजनेस के लिए फंडिंग के विकल्पों की सूची के बारे में बताते हैं.

एंजल इन्वेस्टिंग

एंजल इन्वेस्टर्स वो प्रभावशाली लोग होते हैं, जो उन बिजनेस में पैसा लगाते हैं, जिनके बारे में उन्हें लगता है कि उनमें भविष्य में मुनाफा कमाने का माद्दा है. हालांकि एंजल इन्वेस्टर का दरवाजा खटखटाने से पहले सुनिश्चित कर लें कि आपके पास एक मजबूत बिजनेस प्लान है. ये निवेशक छोटे व्यवसायों पर अपने रिसर्च को अधिक संसाधनपूर्ण बनाने के लिए निवेशक समूह भी बना रहे हैं.

वर्किंग कैपिटल लोन

कम अवधि में पैसों की तंगी को पूरा करने के लिए छोटे व्यापारी इन लोन्स को लेते हैं. जब रोजमर्रा के संचालन के लिए कैश की कमी हो जाती है तो वर्किंग कैपिटल लोन काफी फायदेमंद होता है. इसमें बिजनेस फंडिंग आधे से एक साल तक के लिए दी जाती है और ब्याज दरें 12-16 प्रतिशत के बीच होती हैं. ये बिजनेस के जोखिम के मूल्यांकन पर आधारित होती हैं.

टर्म लोन

टर्म लोन लॉन्ग टर्म लोन्स होते हैं. जब इन्वेस्टर्स को बिजनेस का कोई आइडिया पसंद आता है तो वे उस बिजनेस में पूंजी लगाते हैं और पूरी राशि दे देते हैं. स्मॉल बिजनेस फाइनेंसिंग में ब्याज की कम दर के साथ एक निश्चित अवधि होती है और यह बिजनेस के क्रेडिट प्रोफाइल पर निर्भर करता है. आम तौर पर, ये गारंटी के जरिए सुरक्षित होते हैं लेकिन कर्जदाता इन्हें असुरक्षित तौर पर भी दे सकते हैं. ये 15-20 साल तक के लिए फिक्स्ड ब्याज दर या बदलते रहने वाली ब्याज दर पर निर्भर होते हैं.

इक्विपमेंट एंड इनवॉइस लोन्स

इक्विपमेंट लोन्स मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस में खासकर बिजनेस डीलिंग के लिए होते हैं. बैंक जरूरी और महंगे उपकरणों की खरीद के लिए खास छोटे बिजनेस लोन देते हैं. इनकी रेंज 25 करोड़ तक हो सकती है. हालांकि, कुछ बैंक 100 करोड़ रुपये तक की पेशकश भी करते हैं. इन लोन्स की अवधि कम ब्याज दर के साथ 4-5 वर्ष की होती है. इसमें अन्य सिक्योरिटी के साथ-साथ उपकरण को ही गारंटी मान लिया जाता है.

इनवॉइस लोन आमतौर पर एक इनवॉइस बढ़ाने और भुगतान किए जाने के बीच के अंतर के कारण पूंजी जुटाने के लिए एक उपकरण के रूप में पेश किया जाता है. बैंक एक इनवॉइस की राशि के 80% पर इस तरह के लोन की पेशकश करते हैं और बाकी तब होता है, जब एक इनवॉइस पूरी तरह से चुका दिया जाता है. प्रोसेसिंग फीस और तुलनात्मक रूप से कम ब्याज की एक छोटी राशि काटी जाती है.

क्लाउड फंडिंग और क्राउडफंडिंग

क्लाउड फंडिंग इंटरनेट के जरिए बिजनेस के लिए पूंजी जुटाने का एक तरीका है. इसमें कई निवेशक समूह आपसे आइडियाज मांगते हैं. वहीं क्राउडफंडिंग स्मॉल बिजनेस फाइनेंसिंग से जुड़े लोगों का एक समूह होता है, जो बिजनेस के आइडियाज को विभिन्न भावी निवेशकों तक विभिन्न माध्यमों तक पहुंचाता है. ये निवेश या तो लोन या इक्विटी के आधार पर हो सकते हैं. कई क्राउडफंडिंग वेबसाइट्स निवेश के एवज में रिवॉर्ड्स भी देती हैं. क्राउड फंडिंग आपको बड़े निवेशक की बजाय निवेशकों के समूह तक पहुंच बनाने का अवसर देता है.

पार्टनर्स एंड वेंचर्स कैपिटल (VC)

एक बिजनेस के लिए रणनीतिक साझेदार पूंजी जुटाने का एक बड़ा स्रोत साबित हो सकते हैं क्योंकि वे किसी अन्य बिजनेस की मदद के लिए अपने संसाधनों को जोड़ देते हैं. इन पार्टनर्स के पास बिजनेस का कर्मचारी बनने का विकल्प होता है. दूसरी ओर VC वह कंपनियां होती हैं, जो बिजनेस के शुरुआती चरण में बिजनेस के लिए छोटी फंडिंग मुहैया कराती हैं. लेकिन, वे तुलनात्मक रूप से बड़े निवेशों और कंपनी के नियंत्रण वाले हिस्से को लेने की मांग करते हैं. ये कंपनियां आमतौर पर इक्विटी के खिलाफ निवेश करते हैं और जब अधिग्रहण होता है तो बाहर का रास्ता पकड़ लेते हैं. वे सलाह सेवाएं भी देते हैं और बिजनेस की स्थिरता के लिए उसका मूल्यांकन करते हैं.

सरकारी योजनाएं और बैंक लोन

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना एक सरकारी स्कीम है, जो लघु, सूक्ष्म एवं छोटे उद्योगों (MSME) को वित्तीय सहायता मुहैया कराती है. इन लोन्स को कमर्शियल बैंक, को-ऑपरेटिव बैंक्स, एमएफआई, एनबीएफसी, आरआरबी इत्यादि देते हैं. इस स्कीम में लोन्स को बिजनेस के विभिन्न चरण के मुताबिक विभाजित किया गया है. ये हैं- शिशु, किशोर और तरुण. शिशु के चरण पर आपको 50 हजार रुपये तक का लोन मिलता है. जबकि किशोर और तरुण में रेंज 50 हजार से 5 लाख और 5 लाख से 10 लाख रुपये तक होती है. ये लोन्स किसी वाहन या वर्किंग कैपिटल की जरूरत, प्लांट, उपकरण या मशीनरी के लिए लिए जा सकते हैं और आपको कोई चीज बतौर गारंटी भी नहीं रखनी पड़ती.

बैंक लोन्स आम विकल्प है, जो अच्छे रिकॉर्ड और गारंटी वाले छोटे व्यापारों के लिए लोन देते हैं. आप अपनी जरूरत के मुताबिक छोटी या बड़ी अवधि के लिए बैंक लोन ले सकते हैं.

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