कैसे प्रॉपर्टी के एवज में लोन होम लोन से अलग होता है?

Home Loan against Property

लोन लेने के साथ-साथ उसकी उलझा देने वाली शब्दावली भी साथ में आती है. खासकर जब बात होम लोन की हो, तो कई लोग भ्रम में पड़ जाते हैं कि कैसे प्रॉपर्टी के एवज में लोन होम लोन की तुलना में अलग होता है. कई बार दोनों होम लोन और प्रॉपर्टी के एवज में लोन का इस्तेमाल एक दूसरे के स्थान पर होता है.

ज्यादा बेहतर समझने के लिए, यह जरूरी है कि हम इन दोनों फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स की समीक्षा करें. इंस्टेंट होम लोन के लिए व्यक्ति नौकरी करता हो या खुद का कारोबार हो. उसकी उम्र 21 साल से ज्यादा हो, नियमित आय हो, पेशेवर स्थिरता होने के साथ-साथ अच्छी क्रेडिट हिस्ट्री भी हो. वहीं प्रॉपर्टी के एवज में लोन के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया में व्यक्ति अपने मौजूदा बिजनेस में काम करता हो, उम्र 21 साल हो, मासिक किस्त चुकाने की क्षमता हो और वक्त पर ईएमआई चुकाने का रिकॉर्ड भी हो. आइए अब आपको इनके फीचर्स, फायदे बताते हैं, जो आपको बेहतर चुनने में मदद करेंगे.

क्या है होम लोन?

होम लोन का मतलब है बैंक या वित्तीय संस्थान से घर खरीदने के लिए कर्ज लेना. यह या तो कोई प्लॉट खरीदने के लिए ले सकते हैं ताकि उस पर घर बनाया जा सके या फिर जिस घर में रह रहे हैं, उसे रेनोवेट कराने के लिए लिया जा सकता है. वह संबंधित प्रॉपर्टी तब तक कर्जदाता के पास गिरवी रहेगी और जब आप ब्याज सहित पूरा कर्ज लौटा न दें. इसके बाद वह आपके नाम पर हो जाएगी.

क्या है प्रॉपर्टी के एवज में लोन?

प्रॉपर्टी एक परिसंपत्ति है, जिसे जीवन के मुश्किल दिनों में इस्तेमाल किया जाता है. खुद के कब्जे वाली व्यावसायिक या आवासीय संपत्ति का इस्तेमाल कर्ज लेने के लिए किया जा सकता है. संबंधित प्रॉपर्टी का इस्तेमाल बतौर गारंटी किया जाता है और कर्जदाता ग्राहक की ओर से उधार ली गई राशि का भुगतान करने के लिए प्रॉपर्टी की वैल्यू और आय के मुताबिक वितरित करता है.

प्रॉपर्टी के एवज में लोन बनाम होम लोन

अकसर ग्राहक इन दो ऋणों को लेकर भ्रम में पड़ जाते हैं क्योंकि दोनों ही वित्तीय विकल्प काफी फीचर्स के साथ आते हैं और बड़े खर्चों को पूरा करते हैं. नीचे हम इनका तुलनात्मक पक्ष आपके सामने रख रहे हैं.

ब्याज दरें: चूंकि होम लोन सुरक्षित एडवांस है और असुरक्षित लोन की तुलना में ब्याज दरें कम होती हैं. जिन ग्राहकों की क्रेडिट हिस्ट्री और पुनर्भुगतान की क्षमता अच्छी होती है, उन्हें कम ब्याज दरों पर लोन मिलने के चांस ज्यादा होते हैं. जिन लोगों की ये दो चीजें अच्छी नहीं होतीं, उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. वहीं प्रॉपर्टी के एवज में लोन की ब्याज दरें बदलने रहने वाली या फिर फिक्स्ड होती हैं.

होम लोन ब्याज दरों की तरह ही, ग्राहक उन ब्याज दरों को चुन सकता है, जो उसके लिए सुविधाजनक हो. इसके अलावा, देश के लोगों को किफायती और बेहतर होम लोन देने के लिए ब्याज दरें कुछ अंकों तक सीमित हैं.

अधिकतम लोन राशि: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की गाइडलाइंस के मुताबिक, जब आप होम लोन के लिए ऑनलाइन अप्लाई करते हैं तो किसी शख्स को होम लोन के लिए मिलने वाली लोन राशि की अधिकतम रेंज 75-90 प्रतिशत तक होती है. यह लोन टू वैल्यू रेश्यो पर आधारित होती है. वहीं प्रॉपर्टी के एवज में लोन, लोन टू वैल्यू रेश्यो के 60 प्रतिशत तक होता है. प्रॉपर्टी के एवज में लोन के मामले में राशि ग्राहक की आय और उसकी लोकेशन के आधार पर अलग-अलग हो सकती है.

टैक्स छूट: आयकर अधिनियम के सेक्शन 80सी के मुताबिक, होम लोन के मूल भुगतान पर आपको 1.5 लाख रुपये तक की छूट मिलती है. वहीं टैक्स छूट का ऐसा कोई खास फायदा प्रॉपर्टी के एवज में लोन ऑनलाइन अप्लाई करने पर नहीं मिलता.

लोन की अवधि: होम लोन चुकाने की अधिकतम अवधि 30 साल है क्योंकि यह ज्यादा राशि वाले कर्ज के तहत आता है. वहीं दूसरी ओर, प्रॉपर्टी के एवज में लोन की अधिकतम अवधि 15 साल है.

लोन प्रोसेसिंग टाइम और फीस: चूंकि होम लोन एक सुरक्षित लोन है इसलिए कर्ज देने वाला लोन पूरा होने तक आपका घर बतौर गारंटी रख लेता है. लोन की प्रक्रिया हर कर्जदाता की अलग-अलग होती है. एक बार लगने वाली प्रोसेसिंग फीस लोन राशि के अधिकतम 1.5 प्रतिशत तक हो सकती है.

दूसरी ओर, प्रॉपर्टी के एवज में लोन को मंजूरी प्रॉपर्टी को बतौर गारंटी रखकर दी जाती है और इसके लिए प्रोसेसिंग फीस लोन राशि का 1 प्रतिशत+जीएसटी (प्रोसेसिंग फीस का 18 प्रतिशत) होता है. आमतौर पर प्रॉपर्टी के एवज में लोन में प्रोसेसिंग टाइम और फीस सरल होती है.

प्रीपेमेंट चार्जेज: प्रॉपर्टी के एवज में लोन के मामले में कर्जदाता उन लोन्स पर प्रीपेमेंट फीस लगाते हैं, जो फिस्क्ड रेट से जुड़े होते हैं. लेकिन अगर फ्लोटिंग ब्याज दरें हैं तो कोई चार्ज नहीं लगता. प्रॉपर्टी के एवज में लोन के मामले में, आरबीआई की गाइडलाइंस के तहत कर्जदाता उस लोन पर कोई प्रीपेमेंट फीस नहीं लगा सकते, जिनकी फ्लोटिंग ब्याज दरें (बदलते रहने वाली) हैं.

टैक्स फायदे: आयकर अधिनियम के सेक्शन 80सी के तहत, होम लोन राशि के मूल यानी प्रिंसिपल पर अधिकतम 1.5 लाख रुपये की छूट ली जा सकती है जबकि प्रॉपर्टी के एवज में लोन पर टैक्स छूट को लेकर कोई प्रावधान नहीं है. इसके अतिरिक्त होम लोन के ब्याज पर सेक्शन 24 के तहत 2 लाख रुपये की टैक्स छूट ली जा सकती है.

प्रॉपर्टी की प्रकृति: हाउसिंग लोन सिर्फ रिहायशी, कमर्शियल, रेडी टू मूव, निर्माणाधीन के लिए ही लिया जा सकता है. जबकि प्रॉपर्टी के एवज में लोन सिर्फ कमर्शियल/रिहायशी और इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी के लिए मिलेगा.

बैलेंस ट्रांसफर सुविधा: होम लोन ग्राहक के पास राशि को बेस रेट से MCLR (marginal cost of funds based lending rate) तक ट्रांसफर कराने का विकल्प होता है. लेकिन प्रॉपर्टी के एवज में लोन (LAP) में ऐसी कोई सुविधा नहीं होती.

अब जबकि हमने दोनों ही तरह के लोन क्राइटेरिया, फीचर्स, फायदे और योग्यता के बारे में विस्तार से बता दिया है तो आप आसानी से दोनों के बारे में समझ सकेंगे. एक बात ध्यान रहे कि प्रॉपर्टी के एवज में लोन रेंज ऑफ बिजनेस और निजी दायित्वों को पूरा करते हैं जबकि होम लोन से आप कोई घर या निर्माणाधीन संपत्ति खरीद सकते हैं.

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*