हाउस रेंट अलाउंस बनाम होम लोन: टैक्स बचाने के लिए क्या है बेहतर विकल्प?

समझिए एचआरए टैक्स के फायदे

रियल एस्टेट इंडस्ट्री में बढ़ती कीमतों की वजह से होम लोन लेना एक जरूरत बना गया है. घर रेंट पर लेने से अच्छा है ईएमआई चुकाकर अपना खुद का घर खरीद लिया जाए. यूं तो होम लोन पर कई टैक्स छूट उपलब्ध हैं. ज्यादातर नौकरीपेशा लोगों के सैलरी स्ट्रक्चर में  हाउस रेंट अलाउंस (HRA) एक जरूरी अंश होता है. आमतौर पर, एचआरए एक राशि होती है, जो कंपनी कर्मचारियों को एक घर किराये पर लेने के लिए देता है. बतौर टैक्सपेयर आप हर साल घर के किराए के रूप में एक भुगतान राशि पर टैक्स छूट का दावा कर सकता है. आयकर अधिनियम की धारा 10 (13 ए) के तहत एचआरए छूट का भी दावा किया जा सकता है.

इस आर्टिकल में हम आपको होम लोन और एचआरए में मौजूद टैक्स छूट के फायदों के बारे में बताएंगे.

आइए आपको एचआरए की टैक्स छूट के बारे में बताते हैं.

एचआरए से टैक्स छूट की राशि इन तीनों में न्यूनतम होगी:

– कंपनी से मिला वास्तविक एचआरए
– अगर कर्मचारी किसी मेट्रो सिटी में काम कर हो तो सैलरी का 50 प्रतिशत और गैर-मेट्रो सिटी में सैलरी का 40 प्रतिशत.
– वास्तविक किराया भुगतान से सैलरी का 10 प्रतिशत घटा दें. जिस वेतन से इसे घटाया जाएगा, उसमें मूल+डीए+
कमिशन का टर्न शामिल है.

आइए इसे एक उदाहरण से समझते हैं. ऋषि बेंगलुरु में काम करता है. उसकी बेसिक सैलरी 40000 है. वह एक किराये के घर में रहता है और 10 हजार प्रति महीना किराया भरता है. उसे अपनी कंपनी से 15000 रुपये बतौर एचआरए अलाउंस मिलता है.

ऋषि एचआरए के लिए अपनी टैक्स कटौती ऐसे क्लेम कर सकता है. एचआरए से टैक्स छूट की राशि इन तीनों में न्यूनतम होगी:

कितना एचआरए मिला- 15000

चूंकि वह बेंगलुरु में रहता है इसलिए बेसिक का 50 प्रतिशत = 20000

कितना किराया चुकाया- मूल सैलरी का 10 प्रतिशत= 10 हजार रुपये-4000 रुपये = 6000 रुपये

इसलिए एचआरए में छूट दी जाती है जो होगी = 6,000 रुपये.

बाकी बचा एचआरए, जो एचआरए कंपनी से मिलता है, उसमें से न्यूनतम तीन= 15000-6000=9000 रुपये

इसलिए बाकी बचे 9000 रुपये एचआरए के कारण सैलरी के तहत उसकी टैक्सेबल इनकम के हिस्से के तौर पर आएगा.

होम लोन पर टैक्स छूट: होम लोन ऐसा विकल्प है, जिससे आप अपना घर खरीदने का सपना पूरा कर सकते हैं. होम लोन सभी नामी बैंकों और एनबीएफसी के पास उपलब्ध है. इसके अलावा, होम लोन के साथ कई अन्य फायदे भी ग्राहकों को मिलते हैं.

सेक्शन 80सी के तहत

आयकर अधिनियम के इस सेक्शन के तहत एक होम लोन ग्राहक मूल राशि (प्रिंसिपल अमाउंट) के पुनर्भुगतान पर 1.5 लाख रुपये तक की छूट पा सकता है.

सेक्शन 24बी के तहत

आयकर अधिनियम के इस सेक्शन के तहत, अगर आप अपनी प्रॉपर्टी या किराये पर रह रहे हैं तो आपको भुगतान किए हुए ब्याज पर 2 लाख रुपये की टैक्स छूट मिल जाएगी.

इसलिए कोई शख्स होम लोन पर 3.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट पा सकता है. लेकिन अगर आपका जॉइंट होम लोन है और आपका सह-खरीददार सह-आवेदक भी है तो दोनों ही अलग-अलग 3.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं. इसलिए जॉइंट होम लोन के मामले में 7 लाख रुपये तक ही टैक्स छूट हासिल की जा सकती है.

 

क्या एचआरए और होम लोन को टैक्स छूट के लिए एक साथ क्लेम किया जा सकता है?

जवाब है हां! एचआरए और होम लोन दोनों पर एक साथ टैक्स छूट का दावा किया जा सकता है. लेकिन ऐसा कुछ खास स्थितियों में ही हो सकता है.

– अगर आपने होम लोन के जरिए किसी दूसरे शहर में प्रॉपर्टी खरीदी हो और नौकरी के कारण आप दूसरे शहर में रहते हों या कोई अन्य वैध कारण.

– जब आप किसी निर्माणाधीन संपत्ति के लिए होम लोन लेते है तो उसके पूरे होने तक आपको किराये के मकान में रहना पड़ता है और फिर आपको     नए घर की पोजेशन मिलती है.

– जो संपत्ति आपने होम लोन से ली है, उसे आपने किराये पर दे दया और फिर से आप किराये के मकान में रह रहे हों. ऐसा भी आप कर सकते हैं,         लेकिन उसके लिए कोई वैध कारण होना चाहिए जैसे आप किराये के मकान में इसलिए गए क्योंकि नए घर में आपके परिवार के लिए जगह         कम थी या फिर लोकेशन से जुड़ा कोई मुद्दा.

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