अगर होम लोन की ईएमआई चुकाने में चूक हो गई है तो ये हैं आपके अधिकार

होम लोन सिर्फ एक क्रेडिट प्रॉडक्ट ही नहीं है, यह असल में वित्तीय प्रतिबद्धता है. यह प्रतिबद्धता आमतौर पर एक दशक या उससे ज्यादा समय तक रहती है. ग्राहक एक तय राशि कर्जदाता तो आने वाले वर्षों या अधिकतम 30 वर्षों तक देने का वादा करता है. ग्राहक ईएमआई कैलकुलेटर के जरिए अपनी मासिक ईएमआई का पता होम लोन लेने से पहले लगा सकता है. इसलिए आप फाइनेंस को बेहतर तरीके से प्लान कर सकते हैं.

कमिटमेंट करना बहुत आसान है लेकिन अप्रिय स्थितियों की वजह से उन्हें निभाना मुश्किल हो जाता है. ऐसी बुरी स्थिति जिंदगी में कभी भी आ सकती है, जब आप पैसों की तंगी का सामना कर रहे हों और ईएमआई चुकाने में असमर्थ हों. ऐसी स्थितियां किसी की जिंदगी में बताकर नहीं आतीं. लेकिन बदतर स्थिति में अगर आपको कभी ऐसी स्थिति से गुजरना पड़े तो आपको पता होना चाहिए कि करना क्या है. होम लोन चुनते वक्त हमें हमेशा सर्वश्रेष्ठ की उम्मीद करनी चाहिए और खुद को बदतर स्थिति के लिए तैयार रखना चाहिए. आइए आपको बताते हैं कि होम लोन में चूक क्या होती है और अगर आपके साथ ऐसा होता है तो क्या करना चाहिए.

क्या है होम लोन डिफॉल्ट

जब कोई शख्स ईएमआई न चुका पाए और कर्जदाता के साथ किए लोन की कानूनी समझौते की शर्तों को पूरा न कर पाए तो उसे लोन डिफॉल्टिंग कहते हैं. लोन अग्रीमेंट में लिखा होता है कि ग्राहक हर महीने एक निश्चित राशि कर्जदाता को देगा.लेकिन अगर ग्राहक ईएमआई चुकाना बंद कर दे तो उसे लोन डिफॉल्टर कहा जाता है.

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की इंडियन बैंकिंग असोसिएशन के साथ सहभागिता है और उसने काफी सख्त गाइडलाइंस बनाई हुई हैं, जिसे बैंकों को लोन रिकवर करते समय फॉलो करना है. जब बात होम लोन की आती है तो ग्राहक के लिए काफी संवेदनशील मुद्दा बन जाता है. इस बात को समझते हुए, आरबीआई ने बैंकों की लोन रिकवरी प्रोसेस के लिए ये नियम बनाए हैं. आरबीआई ने यह सुनिश्चित किया है कि अगर कोई शख्स लोन चुकाने में विफल रहता है तब भी उसके साथ सम्मानपूर्वक बर्ताव किया जाए. आइए आपको बताते हैं कि लोन डिफॉल्टर के क्या अधिकार होते हैं.

ये हैं डिफॉल्टर के अधिकार

नोटिस का अधिकार

लोन रिकवरी प्रोसेस की शुरुआत से पहले लोन डिफॉल्टर को बैंक से एक नोटिस मिलना जरूरी है. जब ग्राहक 90 दिनों तक ईएमआई नहीं चुका पाता तो बैंक उसे अगले 60 दिनों का नोटिस भेजता है. अगर 60 दिनों का नोटिस पीरियड भी खत्म हो चुका है और तब भी लोन नहीं चुकाया गया तो बैंक उसके खिलाफ लीगल एक्शन ले सकता है.

बात सुने जाने का अधिकार

नोटिस पीरियड के दौरान, लोन डिफॉल्टर कर्जदाता से बात कर नोटिस के खिलाफ आपत्ति दर्ज करा सकता है. इसके 7 दिनों के भीतर बैंक के अफसर को वैध कारण बताना होगा कि वह ग्राहक की एप्लिकेशन क्यों रिजेक्ट कर रहा है.

उचित मूल्य का अधिकार

बदतर स्थितियों में, अगर बैंक आपकी संपत्ति जब्त कर लेता है तो आपकी सहमति से ही संपत्ति मूल्य को अंतिम रूप दिया जाना चाहिए. अगर आपको लगता है कि कर्जदाता प्रॉपर्टी का मूल्य कम आंक रहा है तो आप आवाज उठा सकते हैं. ऐसे मामलों में आप आपत्ति या फिर वो कीमत बता सकते हैं जो वाजिब हो. इसके अलावा आप कोई अच्छा ग्राहक ढूंढकर उसकी कर्जदाता के साथ बैठक करा सकते हैं, जो मानता हो कि वह कोई अच्छी डील करा सकता है.

नीलामी प्रक्रिया के संतुलन का अधिकार

नीलाम संपत्ति की शेष राशि पर लोन डिफॉल्टर का अधिकार होता है. अगर घर को बैंक की ओर से अधिक राशि पर बेचा जाता है, तो आपको अतिरिक्त राशि मिलने का अधिकार है.

अगर वसूली कर्मचारी आपके घर का दरवाजा खटखटाएं तो क्या करें?

अगर आपने 5 महीने से ईएमआई नहीं चुकाई है और आपको बैंक की ओर से नोटिस भी मिल चुका है तो इसके बाद बैंक के वसूली कर्मचारी आपका दरवाजा खटखटाएंगे. लेकिन अगर वे आपके घर आते हैं तो भी आपके कुछ अधिकार हैं.

अगर बैंक के वसूली कर्मचारी घर आएं तो ये हैं आपके अधिकार

उनका आईडी चेक करने का अधिकार

सबसे पहले आप एजेंट्स से आईडी कार्ड दिखाने को कह सकते हैं. कर्मचारियों को वसूली का काम करने के लिए भारतीय बैंकिंग और वित्त संस्थान द्वारा अधिकृत किया जाना चाहिए. सभी रिकवरी एजेंटों के पास आईडी कार्ड और बैंक का अधिकृत पत्र होना चाहिए.

प्राइवेसी का अधिकार

वसूली कर्मचारियों को सिर्फ अपने काम से मतलब होना चाहिए. किसी भी एजेंट को लोन डिफॉल्टर के परिवार के सदस्यों से बात करने का अधिकार नहीं है. एजेंट्स परिवार से तभी बात करेंगे, जब लोन डिफॉल्टर घर पर नहीं होगा. एजेंट्स डिफॉल्टर के घर सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक ही आ सकते हैं. एजेंट्स किसी भी हाल में डिफॉल्टर को धमका नहीं सकते. अगर वे ऐसा करते हैं तो आप उनके खिलाफ शिकायत कर सकते हैं.

सम्मानपूर्वक बर्ताव का अधिकार

आपके लोन की स्थिति कैसी भी हो, बैंक का कस्टमर होने के नाते सम्मान मिलना आपका अधिकार है. लोन डिफॉल्टर का भारतीय कानून कहता है कि कलेक्शन ऑफिसर आपसे विनम्रता और सहूलियत के हिसाब से मीटिंग के लिए कहेंगे. यह सहूलियत भी लोन डिफॉल्टर के एक अधिकार में से एक है. कलेक्शन एजेंट्स को किसी भी आपत्तिजनक भाषा या बदतमीजी किए बिना डिफॉल्टर के साथ सम्मानजनक तरीके से व्यवहार करना है.

बचने का तरीका

अगर आपके साथ ऐसा होता है कि आप लोन नहीं चुका पाते और वसूली कर्मचारी आपके दरवाजे पर पहुंचते हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि यहां मामला खत्म हो गया. अब भी ऐसे कई तरीके हैं, जिससे आप अपनी प्रॉपर्टी बचा सकते हैं.

सबसे पहले आप अपने कर्जदाता से बात करें. ध्यान रहे कि बैंक या वसूली कर्मचारियों के फोन को नजरअंदाज न करें. इससे आपकी परेशानियां और बढ़ सकती हैं. आपको अपने कर्जदाता को फोन करके अपनी वित्तीय स्थिति बतानी चाहिए ताकि वह नोटिस पीरियड को बढ़ा दें.

खुद को बचाने का तरीका वन टाइम सेटलमेंट भी है. यह वो प्रक्रिया है, जहां बैंक लोन इंट्रस्ट माफ कर देता है और आपको सिर्फ मूल राशि यानी प्रिंसिपल अमाउंट ही चुकाना होता है. लेकिन ध्यान रहे कि यह सब आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में दिखाई देगा.

अगर और सर्वश्रेष्ठ तरीका है लोन का पुनर्गठन. यह तरीका चुनकर आप कर्जदाता से अपनी लोन अवधि बढ़ाने को कह सकते हैं, ताकि ईएमआई की राशि कम हो जाए और फिर से ईएमआई चुकाने के काबिल बन जाएं.

होम लोन कई लोगों के लिए घर खरीदने की पहली सीढ़ी होती है. दुनिया भर से लोग घर खरीदने के लिए इसका इस्तेमाल वित्तीय सहायता के लिए करते हैं. लेकिन इसी दौरान, हमें इसका इस्तेमाल ध्यानपूर्वक करना है क्योंकि लोन न चुकाने से आपका ड्रीम होम हाथ से फिसल सकता है.

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