कोरोना वायरस का कहर: बैंकों ने ग्राहकों को राहत देने के लिए आरबीआई से लगाई गुहार

कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के कारण कॉर्पोरेट कैश फ्लो में रुकावटें पैदा हो गई हैं. लिहाजा भारतीय कर्जदाता भारतीय रिज़र्व बैंक से उधारकर्ताओं को राहत देने की मांग कर रहे हैं और प्रभावित क्षेत्रों को मार्च तिमाही में बैड लोन के तौर पर क्लासिफाई नहीं कर रहे हैं.

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि बैंक एविएशन, टूरिजम, छोटे ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स की समीक्षा कर रहे हैं, जिन पर कोविड-19 की मार पड़ी है. उन्होंने कहा, ‘इससे इकोनॉमी पर कुछ असर पड़ेगा.’

सूत्रों के मुताबिक, बैंक छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों को किफायती लोन देने को तैयार हैं जो सप्लाई और ग्राहकों की कमी के कारण मौजूदा तिमाही में ज्यादा मुश्किलों का सामना करेंगे. एसबीआई चेयरमैन ने कहा, कंपनियां हमें बता रही हैं कि लोन चुकाने में उन्हें देरी हो जाएगी और इसके लिए हमने आरबीआई से मंजूरी मांगी है. चूंकि यह एक आश्चर्यजनक घटना है इसलिए कंपनियों की बात जायज है.

bofA सिक्योरिटीज ने अनुमान जताया है कि एक महीने के शटडाउन से भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लगभग 50 बेसिस पॉइंट्स खर्च होंगे.

बैंक इस बात को लेकर भी परेशान हैं कि औद्योगिक क्षेत्र में लोन की वृद्धि दर 1.6 प्रतिशत पर आ गई है क्योंकि मध्यम और बड़े उद्योगों में ग्रोथ सिंगल डिजिट क्रमश: 2.5 प्रतिशत और 1.8 प्रतिशत पर आ गई है.

इसके अलावा, कुछ बड़े क्षेत्र, जिनमें पूरे इंडस्ट्रियल लोन का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा आता है, उसने लोन की वृद्धि को नकारात्मक कर दिया. इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर, पेट्रोलियम, कैमिकल्स, मेटल्स और फूड प्रोसेसिंग जैसे सेक्टर्स आते हैं. इतना ही नहीं, तीसरी तिमाही में इन बड़ी इंडस्ट्रीज के बैड लोन ज्यादा हैं, जिससे क्रेडिट ग्रोथ पर और असर पड़ेगा.

कॉरपोरेट फाइनेंस की कमान संभालने वाले लोग कहते हैं कि इस महामारी के कारण मार्च की तिमाही में काफी परेशानियां आ सकती हैं. बजाज ग्रुप के फाइनेंस डायरेक्टर प्रभल बनर्जी ने कहा, ‘यह स्थिति बेहद खराब है. दो साल के लिए प्रिंसिपल रीपेमेंट पर स्थगन होना चाहिए और कॉरपोरेट्स के लिए ब्याज पर छह महीने के लिए. लोन के शुद्ध वर्तमान मूल्य को भी ब्याज की दर को समायोजित करके संरक्षित किया जाना चाहिए.’

रेटिंग एजेंसी CRISIL ने एक चेतावनी में कहा, ‘एयरलाइंस, एयरपोर्ट, होटल, मॉल, मल्टीप्लेक्स, रेस्तरां और खुदरा विक्रेताओं सहित ज्यादा जोखिम वाले सर्विस सेक्टर के लिए ऋण स्थगन होना चाहिए.’ आगे कहा गया कि कुछ प्रभावित कंपनियां लागत में कटौती कर सकती हैं. लेकिन यह भी काफी नहीं है क्योंकि इन्फ्लेक्सिबल ओवरहेड्स  के कारण उनकी क्रेडिट प्रोफाइल्स खराब हो सकती है.

कोविड-19 का स्टील, रत्न और जवाहरात, कंस्ट्रक्शन और इंजीनियरिंग व टैक्सटाइल्स जैसे सेक्टर्स पर सीधा असर शायद न पड़े, लेकिन मौजूदा वैश्विक और घरेलू आर्थिक मंदी से डिमांड और वसूली पर प्रभाव जरूर पड़ेगा. हालांकि अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव के परिणाम बाद में ही सामने आएंगे.

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