कैसे आप एक साथ ले सकते हैं बिजनेस लोन और पर्सनल लोन?

आजकल की लाइफस्टाइल ने न सिर्फ जीने की क्वॉलिटी को बढ़ा दिया है बल्कि लोगों की जेबों के बोझ में भी इजाफा कर दिया है. अच्छी लाइफस्टाइल जीने के लिए आपके पास एक्स्ट्रा फंड्स भी होने चाहिए. लेकिन उस वक्त क्या करें, जब आपने पहले से ही एक लोन ले रखा हो? इसी सवाल के साथ अन्य सवाल भी उठते हैं कि क्या आप एक साथ दो लोन ले सकते हैं? आइए आपके इन्हीं सवालों का जवाब देते हैं.

जी हां, आप पर्सनल लोन और बिजनेस लोन एक साथ ले सकते हैं. अब आप सोचेंगे वो कैसे? कई कर्जदाता यह जानते हुए भी कि आपने पर्सनल लोन लिया हुआ है, आपको बिजनेस लोन मुहैया कराते हैं. ऐसे कर्जदाता विभिन्न फैक्टर्स के आधार पर लोन अप्रूव करते हैं.

आय से कर्ज का अनुपात

कम कर्ज से आय (डीटीआई) का अनुपात आपके कर्ज और आय के संतुलन को दिखाता है. यह ग्राहक की कर्ज लेने वाली क्षमता पर सीधा असर डालता है. एक कम कर्ज से आय का अनुपात आमतौर पर 40 प्रतिशत से कम होता है और यह दिखाता है कि आय और कर्ज के बीच अच्छा संतुलन है. कर्जदाता कम कर्ज से आय का अनुपात जरूर देखते हैं  क्योंकि यह संकेत देता है कि ग्राहक अतिरिक्त कर्ज भी जिम्मेदारी के साथ मैनेज कर सकता है. जितना कम डीटीआई होगा, उतनी ज्यादा ग्राहक को लोन मिलने की संभावना होगी.

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क्रेडिट स्कोर

पर्सनल लोन की एप्लिकेशन की प्रोसेसिंग के वक्त क्रेडिट हिस्ट्री एक बड़ा फैक्टर होता है. इसका प्रबंधन क्रेडिट ब्यूरोज के पास होता है. 750 या उससे ज्यादा का क्रेडिट स्कोर अच्छा माना जाता है. अगर किसी आवेदक का कम क्रेडिट स्कोर है तो चांस हैं कि आपकी पर्सनल लोन एप्लिकेशन रिजेक्ट हो जाए या फिर आपको ज्यादा ब्याज दरों पर लोन मिले.

आय

ज्यादा आय होगी तो ब्याज दर कम हो जाएगा. ज्यादा आय वाले ग्राहक पर होने से कर्जदाता को भरोसा होता है क्योंकि लोन डिफॉल्ट होने के चांस कम हो जाते हैं. उदाहरण के तौर पर अगर किसी शख्स की आय 25 हजार रुपये प्रति माह है तो कर्जदाता उसे 14 प्रतिशत की ब्याज दर पर लोन ऑफर करेगा.वहीं अगर किसी की तनख्वाह 70 हजार है तो उसे उसी कर्जदाता से 12 प्रतिशत की दर पर पर्सनल लोन मिल जाएगा.

कंपनी की धाक

लोन ब्याज दर तय करने में आवेदक की कंपनी भी अहम भूमिका निभाती है. नामी और स्थिर ऑर्गनाइजेशन में काम करने वालों को कम ब्याज दर पर लोन मिलता है. ऐसा इसलिए क्योंकि कर्जदाता नामी कंपनियों के कर्मचारियों के करियर को स्थिर मानते हैं और समझते हैं कि वे  कर्ज चुकाने में ज्यादा जिम्मेदार होंगे.

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क्रेडिट रीपेमेंट हिस्ट्री

अगर किसी आवेदक की अच्छी रीपेमेंट हिस्ट्री है तो लोन अप्रूवल और ब्याज दर के मामले में यह सकारात्मक भूमिका निभाती है. कर्जदाता देखता है कि आवेदक भुगतान के मामले में अनुशासित है तो वह ब्याज दरें कम करने में हिचकता नहीं है.

डिफॉल्ट्स

अगर कर्जदाता को आवेदक की क्रेडिट प्रोफाइल में दोष मिलता है तो या तो वह लोन एप्लिकेशन रिजेक्ट कर देता है या फिर ज्यादा ब्याज दर पर लोन देता है. ज्यादातर कर्जदाता ऐसे आवेदक चाहते हैं, जिनका लोन डिफॉल्ट न हो.

कर्जदाता से रिश्ते

हम में से अधिकतर लोग एक ही बैंक में सेविंग्स अकाउंट और फिक्स्ड डिपॉजिट खोलना पसंद करते हैं. इससे आप बैंक के वफादार ग्राहक बन जाते हैं. इसी की वजह से आपका एक संबंध भी बन जाता है, जिसका लाभ उठाकर आप पर्सनल लोन की जरूरत के वक्त कम ब्याज दरों पर लोन ले सकते हैं. मौजूदा ग्राहक होने के कारण आपको जरूर कुछ न कुछ फायदे मिलेंगे क्योंकि आप बैंक के मौजूदा ग्राहक हैं और बैंक आपको खोना बिल्कुल नहीं चाहेगा.

लोन की ईएमआई को कैसे मैनेज करें

अगर आप पर्सनल लोन और बिजनेस लोन को एक वक्त में ही इस्तेमाल कर रहे हैं तो आपको बहुत ज्यादा मासिक किस्त चुकानी पड़ेगी.  इसलिए ईएमआई को मैनेज करना आपकी शीर्ष प्राथमिकता होनी चाहिए. आइए आपको कुछ तरीकों के बारे में बताते हैं:

अपनी भुगतान की क्षमता जानें

उतना ही लोन लें, जितने की किस्त आप हर महीने चुका सकें. ऑनलाइन ईएमआई लोन कैलकुलेटर ईएमआई की गणना करने में आपकी मदद कर सकता है. इससे आपको पहले ही पता चल जाएगा कि हर महीने कितनी किस्त कटेगी.

लंबी पुनर्भुगतान अवधि चुनें

लोन के भुगतान की अवधि का आपकी लोन की राशि पर सीधे असर पड़ता है. लंबी पुनर्भुगतान अवधि चुनने से आप लंबे समय तक लोन चुका सकते हैं, जिससे आपकी ईएमआई की राशि कम हो जाएगी.

निजी खर्चों को मैनेज करें

अगर आपका पहले से ही लोन चल रहा है और आप दूसरा लोन लेना चाहते हैं तो पहले आपको देखना होगा कि सभी लोन के लिए कितनी राशि चुकानी है. दोनों लोन की हर महीने की ईएमआई आपकी मासिक तनख्वाह के 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. आप  आय का अतिरिक्त स्रोत भी तलाश सकते हैं. तभी आप अपने रोजमर्रा के खर्चों और निजी खर्चों को आसानी से चला पाएंगे.

कभी कोई ईएमआई मिस न करें

लगातार ईएमआई चुकाने से आपका क्रेडिट स्कोर बेहतर होता है. इससे आपको औरों की तुलना में कम ब्याज दरों पर लोन मिलता है. इसलिए अच्छा क्रेडिट स्कोर बनाए रखें और अपने क्रेडिट कार्ड बिल और मौजूदा लोन समय पर चुकाएं ताकि आपको अच्छी लोन डील मिल सके. ईएमआई का वक्त पर भुगतान जरूरी है.

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