क्या है प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, जानें इसके बारे में सब कुछ

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) भारत सरकार की एक योजना है, जिसके तहत नॉन-कॉरपोरेट्स, छोटे व सूक्ष्म उद्योगों को 10 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता है. PMMY के तहत, जो लोग गैर-कृषि कार्यों में शामिल होते हैं, वे भी 10 लाख रुपये तक का लोन ले सकते हैं. निजी क्षेत्र के बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs), माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशंस (MFI), सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB), राज्य व शहरी सहकारी बैंकों और विदेशी बैंकों द्वारा मुद्रा योजना के तहत लोन दिया जाता है.

मुद्रा (MUDRA) योजना

MUDRA (माइक्रो यूनिट्स डेवेलपमेंट एंड रीफाइनेंस एजेंसी) योजना सूक्ष्म उद्योग क्षेत्र को वित्तीय सुविधा देता है, जिसमें छोटी उत्पाद इकाइयां, फूड सर्विस यूनिट्स और छोटे उद्योग शामिल हैं. MUDRA की स्थापना का मूल मकसद व्यापार, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में शामिल छोटे व्यापार संस्थानों को संस्थागत वित्त की सुविधा मुहैया कराना है.

MUDRA लोन योजना का मकसद NCSBS (गैर-कॉर्पोरेट लघु व्यवसाय क्षेत्र) और स्वयं खाता व्यापार को औपचारिक बैंकिंग सिस्टम में शामिल करने का था. आमतौर पर भारत में NCSBS में स्ट्रीट वेंडर, रिपेयर शॉप ओनर, स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज और कारीगर शामिल हैं. ये छोटे व्यवसाय, जिनमें से कई असंगठित हैं, लगभग 10 करोड़ भारतीयों को रोजगार मुहैया कराते हैं.

प्रधानमंत्री MUDRA योजना के बारे में जानें अहम बातें:

आइए अब आपको प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की अहमियत के बारे में बताते हैं:

कितना लोन दिया जाता है- इस स्कीम में तीन श्रेणियां हैं, जिनके तहत लोन दिया जाता है. ये हैं:
शिशु – इसमें 50 हजार रुपये तक का लोन दिया जाता है.
किशोर – इस में लोन की राशि 50001- 5 लाख रुपये तक होती है.
तरुण – इसमें लोन की राशि 5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक होती है.

कौन लोन ले सकता है

कोई भी कारोबारी या व्यापार, जो पहले कभी डिफॉल्टर न रहा हो वो प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के तहत लोन ले सकता है. लिहाजा बिजनेस मालिक प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां, पब्लिश सेक्टर की कंपनियां, स्वामित्व कंपनियां या फिर कोई भी कानूनी बिजनेस मुद्रा लोन के लिए अप्लाई कर सकता है.

लोन देने का मकसद क्या है

चूंकि मुद्रा लोन एक बिजनेस लोन है, इसलिए लोन राशि का इस्तेमाल निजी कामों के लिए नहीं किया जा सकता. मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज और ट्रेडिंग सेक्टर्स में काम करने वाले छोटे उद्योगों को यह लोन दिया जाता है. मुद्रा लोन से मिली राशि का इस्तेमाल कारोबारी मार्केटिंग, वर्किंग कैपिटल, बिजनेस को आगे बढ़ाने व कैपिटल असेट्स हासिल करने के लिए कर सकते हैं.

ब्याज दरें

मुद्रा स्कीम के तहत जो लोन मिलता है, उसकी ब्याज दर बेहद कम होती है और मंजूर लोन की मात्रा के आधार पर अलग-अलग होती है. मौजूदा ब्याज दर मानदंडों के अनुसार नवंबर 2015 से, निम्नलिखित लागू दरें हैं:

शिशु: शिशु लोन्स 50 हजार रुपये तक की सीमा तक लिए जा सकते हैं.
किशोर: PMMY लोन्स 50 हजार रुपये से ज्यादा और 5 लाख रुपये तक मिल सकते हैं और इन मामलों में ब्याज दरें ग्राहक की पैसों को लेकर विश्वसनीयता और लोन को         मंजूरी लेने वाले बैंक पर निर्भर करता है.
तरुण: तरुण लोन्स में ग्राहक को 5 लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है. हर मामले में लागू ब्याज दरें अलग-अलग हो सकती हैं.

अधिकतम अवधि

PMMY के मौजूदा नियमों के मुताबिक, अधिकतम पुनर्भुगतान अवधि 5 साल तक बढ़ाई जा सकती है. हालांकि पुनर्भुगतान अवधि छोटी भी हो सकती है, अगर कर्जदाता लोन मंजूरी के वक्त ऐसा चाहे तो.

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के प्रकार

MUDRA योजना ऑफर्स के गुलदस्तों के साथ आते हैं. इसमें से कुछ हैं:-

1. माइक्रो क्रेडिट स्कीम: इस स्कीम के तहत, माइक्रो फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन्स (MFIs) के तहत वित्तीय सहायता दी जाती है ताकि वे 1 लाख रुपये तक का लोन दे सकें. आमतौर पर इस तरह के लोन के वितरण का तरीका स्पेसिफिक माइक्रो एंटरप्राइज एक्टिविटीज, जॉइंट लायबिलिटीज ग्रुप्स (JLGs) और सेल्फ हेल्प ग्रुप्स (SHGs)  में लोगों को शामिल कर सकता है.

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2. विमिन एंटरप्राइजेज प्रोग्राम (महिला उद्यमी योजना): यह स्कीम में खासतौर पर महिला उद्यमियों को ध्यान में रखकर लाया गया है. यह महिला उद्यमियों, व्यक्तिगत महिला उद्यमियों, महिलाओं के संयुक्त दायित्व समूहों और स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहित करने के लिए बनाया गया है, ताकि वे सूक्ष्म उद्योग स्थापित कर सकें. ऐसे मामलों में कुछ खास रियायतें भी दी गई हैं. उदाहरण के तौर पर दिए गए लोन की ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की कमी की गई है.

3. बैंकों के लिए रीफाइनेंस स्कीम: MUDRA के तहत बैंकों, जिसमें शेड्यूल्ड को-ऑपरेटिव बैंक, रीजनल रूरल बैंक और कमर्शियल बैंकों को आसानी से 10 लाख रुपये तक का लोन देने की इजाजत है. रीफाइनेंस की सुविधा तभी उपलब्ध है, जब इन बिजनेस लोन्स को माइक्रो एंटरप्राइजेज एक्टिविटीज के लिए दिया गया हो. रीफाइनेंस सुविधा का लाभ उठाने के लिए बैंकों को समय-समय पर अधिसूचित जरूरतों का पालन करना होता है.

4. मुद्रा कार्ड: मुद्रा कार्ड एक नया क्रेडिट प्रोडक्ट है, जो छोटे उद्योगों के लिए पैसा आसानी से उपलब्ध कराता है. साथ ही कार्ड के मालिक को फ्लेक्सिबिलिटी भी मिलती है. इसे या तो ओवरड्राफ्ट (लोन) लिमिट के साथ क्रेडिट कार्ड के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है या फिर एटीएम से निकासी वाली सुविधा जैसे डेबिट कार्ड की तरह. मुद्रा कार्ड का इस्तेमाल व्यवसायों द्वारा अपनी अनूठी नकदी-क्रेडिट व्यवस्था के तहत वर्किंग कैपिटल हासिल करने के लिए किया जा सकता है.

5. क्रेडिट गारंटी फंड: इसे पोर्टफोलियो क्रेडिट गारंटी के तौर पर भी जाना जाता है. इसमें निर्माण और स्पेशल फंड का इस्तेमाल शामिल होता है, जिसे क्रेडिट गारंटी फंड फॉर माइक्रो यूनिट्स (CGFMU) कहा जाता है. इस फंड का प्रबंधन नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड करती है और वे योग्य उद्योगों को आसानी से माइक्रो लोन्स मुहैया कराती है.

6. इक्विपमेंट फाइनेंस स्कीम: यह स्कीम भी मुद्रा योजना के तहत आती है और छोटे उद्योगों को लोन देकर मशीनरी खरीदने या अपग्रेड करने में मदद करती है. ये एंटरप्राइजेज को अपनी निर्माण तकनीक बढ़ाने में प्रोत्साहित करती है ताकि उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़े और बिजनेस की क्षमता.

7. माइक्रो एंटरप्राइजेज को क्रेडिट: MUDRA लोन के मूल मकसदों में से एक योजना से लाभ की मात्रा और लाभार्थियों की संख्या दोनों को ज्यादा से ज्यादा करना भी है. भारत की जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा फिलहाल कुछ खास सेक्टर्स में शामिल है. लेकिन वह सिर्फ जमीनी यातायात, फूड प्रोडक्शन, टेक्सटाइल प्रोडक्शन और कम्युनिटी सर्विसेज तक ही सीमित नहीं है. इन सेक्टर्स की विकास की जरूरतों को हासिल करने के लिए विभिन्न स्कीमों को लाया गया है ताकि ये सूक्ष्म उद्योग फल-फूल सकें.

इसमें बैंकों के लिए क्या खास है?

यह तो जाहिर है कि मुद्रा योजना से भारत में संचालित छोटे कारोबारों को फायदा पहुंचेगा और देश के विकास में भी यह योगदान देगा. लेकिन यह स्कीम बैंकों, कर्जदाताओं को भी फायदा देगा. मुद्रा लोन देने के लिए गिरवी रखी गई कोई चीज कर्जदाता के लिए जोखिम कम करेगी. इसके अतिरिक्त, लोन से अगर कोई संपत्ति खड़ी की जाती है तो उसे भी बैंक जब्त कर सकता है.

– यदि ग्राहक बिजनेस में नुकसान होने के कारण देनदारियों का भुगतान करने में नाकाम रहता है तो सूक्ष्म और लघु उद्यमों (CGTMSE) के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट का प्रावधान बैंक को सुरक्षा प्रदान करता है.

– बैंक डीपीएन (डिमांड प्रॉमिसरी नोट) के लिए भी कह सकता है, जो ब्याज दर पर लोन की राशि का भुगतान करने के लिए ग्राहक की ओर से किए वादे का लिखित नोट है.

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