क्या होता है बिजनेस लोन और लाइन ऑफ क्रेडिट, ये हैं 8 फर्क

फंडिंग, खड़ा होने और ग्रोथ हर बिजनेस की शुरुआत के लिए जरूरी हैं. लेकिन जब आप फाइनेंस के बारे में सोचते हैं तो आपको अपने व्यापार की वित्तीय स्थिति पर विचार जरूर करना चाहिए. आपको सोचना चाहिए कि किस तरह का बिजनेस लोन लें और वह कैसे मिलेगा. कई लोगों के पास कैश होता है. लेकिन बहुत व्यापारी ऐसे हैं (बहुलता में) जो छोटा बिजनेस लोन या इंस्टेंट बिजनेस लाइन ऑफ क्रेडिट का विकल्प चुनते हैं. बिजनेस लोन और लाइन ऑफ क्रेडिट बिजनेस की पूंजीगत जरूरतों को पूरा करने के लिए लिए जाते हैं जैसे नई संपत्ति खरीदना, क्षमता बढ़ाना, नए बाजारों में फैलाव और बिजनेस को बढ़ाने में अतिरिक्त निवेश. लेकिन बिजनेस लोन और लाइन ऑफ क्रेडिट अपना-अपना मकसद पूरा करते हैं.

अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए कोई संस्था इन दोनों में से कोई भी विकल्प चुन सकती है. लेकिन इससे पहले कि हम इसके अहम बिंदुओं से आपको रूबरू कराएं, आइए जानते हैं कि इन दोनों का मतलब क्या है.

बिजनेस लोन

जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है एनबीएफसी या निजी कर्जदाता की तरफ से एकमुश्त राशि व्यापारी को दी जाती है, ताकि वह अपनी बिजनेस से जुड़ी जरूरतें पूरी कर सके. ज्यादातर मामलों में कर्जदाता एक निश्चित अवधि के लिए ब्याज पर लोन लेता है. लोन राशि अकाउंट में पहुंचने से पहले ब्याज दर और पुनर्भुगतान की शर्तों पर कारोबार मालिक और कर्जदाता हामी भरते हैं.

बिजनेस लाइन ऑफ क्रेडिट

आसान शब्दों में बिजनेस लाइन ऑफ क्रेडिट को समझाएं तो यह क्रेडिट कार्ड्स की तरह ही काम करता है, जिसमें पहले से तय क्रेडिट लिमिट होती है.  यहां बिजनेस के पास क्रेडिट लिमिट की सीमा के भीतर अपनी जरूरतों के हिसाब से फंड हासिल करने का विकल्प होता है. एक कंपनी सिर्फ अपने लाइन ऑफ क्रेडिट का एक हिस्सा ही इस्तेमाल कर सकती है और उसके बाद कर्ज ली हुई राशि पर नियम व शर्तों के मुताबिक ब्याज चुकाना होगा. इसके लिए कर्जदाता और कारोबारी के बीच कॉन्ट्रैक्ट भी साइन होता है.

अब जब हमें यह पता चल गया है क ये दो छोटे बिजनेस लोन होते क्या हैं और समझते हैं कि इन दोनों के बीच फर्क क्या है.

कई यूजर्स बनाम वन टाइम यूजर

छोटे बिजनेस लोन सिंगल बिजनेस के लिए दिए जाते हैं. ज्यादातर मामलों में कर्ज देने वाला लोन का बड़ा हिस्सा वापस पाने की उम्मीद करेगा और नए लोन के लिए हां करने से पहले पहले ब्याज के साथ भुगतान करने को कहेगा. लेकिन कर्ज लेने वाला बिजनेस की किसी भी गतिविधि के लिए अपने विवेक के मुताबिक फंड का इस्तेमाल कर सकता है वो भी कर्जदाता को बताए बिना.

वहीं बिजनेस लाइन ऑफ क्रेडिट के मामले में, क्रेडिट कार्ड की तरह तय सीमा के भीतर आप किसी ही बार फंड का इस्तेमाल कर सकते हैं. हालांकि, कुछ कर्जदाता आपसे हर बार पैसा निकालने के लिए चार्ज लेते हैं. इसलिए पैसा निकालते वक्त उस क्लॉज को जरूर देख लें.

योग्यता

कर्जदाता लोन देने के लिए आपके पर्सनल फाइनेंस से ज्यादा आपके बिजनेस फाइनेंस को देखेगा. योग्यता साबित करने के लिए आपके बिजनेस को कम से कम दो साल का वक्त हो चुका हो और पिछले साल का रेवेन्यू 10 लाख रुपये हो. लाइन ऑफ क्रेडिट हासिल करने के लिए आपको शानदार क्रेडिट स्कोर बरकरार रखना होगा. इसके अलावा आपकी आय और कर्ज से आय का अनुपात भी योग्यता तय करता है.

पुनर्भुगतान की शर्तें

बिजनेस लोन हासिल करने के बाद आपको मासिक किस्त भी चुकानी पड़ती है. पूरी अवधि में ये मासिक किस्तें बदलती नहीं हैं. लिहाजा आप क्रेडिट का इस्तेमाल करें या नहीं आपकी मासिक किस्तों पर उसका कोई असर नहीं पड़ेगा.

लेकिन लाइन ऑफ क्रेडिट में आप उधार ली गई राशि के भुगतान के हकदार हैं. अगर आप अपनी सीमा को पार कर चुके हैं तो अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए आप और पैसा नहीं निकाल पाएंगे. पहले आपको पुरानी राशि चुकानी होगी.

क्लोजिंग अकाउंट कॉस्ट

छोटे बिजनेस लोन की क्लोजिंग कॉस्ट हमेशा लाइन ऑफ क्रेडिट की तुलना में ज्यादा होती है. लेकिन इस नियम के कई अपवाद भी हैं. बिजनेस लोन को बंद कराने की लागत आपकी कुल लोन राशि की 2-7 प्रतिशत होगी. लेकिन खुशखबरी यह है कि कई उभरते एनबीएफसी इसमें राहत दे रहे हैं. अगर आप 6 ईएमआई चुकाने के बाद अपना लोन समय से पहले बंद कराना चाहते हैं तो वे आप पर कोई चार्ज नहीं लगाते. वहीं दूसरी ओर, लाइन ऑफ क्रेडिट को बंद कराने की लागत बहुत मामूली है. यही सबसे बड़ा फर्क है, दोनों के बीच.

 

लोन की अवधि (लॉन्ग टर्म या शॉर्ट टर्म)

छोटे बिजनेस लोन आमतौर पर लंबी अवधि के लोन के लिए बेहतर होते हैं जो लंबी अवधि में (जैसे एक साल से ज्यादा) भुगतान किए जाते हैं. नए उभरते कारोबारों के साथ-साथ कई शॉर्ट टर्म लोन भी इन दिनों पॉपुलर हो रहे हैं. आप इनवॉयस फंडिंग के जरिए एक महीने के लिए भी बिजनेस फंडिंग जुटा सकते हैं.

वर्किंग कैपिटल की जरूरत में अचानक इजाफे की वजह से लाइन ऑफ क्रेडिट को शॉर्ट टर्म के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है. इसलिए सलाह दी जाती है कि लाइन ऑफ क्रेडिट का इस्तेमाल तुरंत और छोटी अवधि की नकदी जरूरतों के लिए किया जाना चाहिए क्योंकि इसके साथ फंडिंग की ऊंची लागत जुड़ी होती है.

ब्याज दर

बिजनेस लोन की ब्याज दर हर कर्जदाता की अलग-अलग होती है. लेकिन वे फिक्स होती हैं और बार-बार नहीं बदलतीं. जब कम लंबी अवधि की फंडिंग शुरुआती ऊंची फंडिंग लागतों को पूरा कर देती है तो लंबी अवधि में यह उसे और ज्यादा कारगर उधार लेने वाला साधन बनाता है. अगर आप एक निश्चित आकार के लोन पर ब्याज चुका रहे हैं तो कर्जदाता आपको नियमित तौर पर डिस्काउंट ऑफर करता है.

वहीं लाइन ऑफ क्रेडिट के मामले में, ब्याज दर कम लेकिन परिवर्तनीय होती है. लिहाजा, अगर कोई स्टार्टअप खराब तरह से अपना लाइन ऑफ क्रेडिट मैनेज करता है, देरी से भुगतान करता है और क्रेडिट लिमिट को पार कर जाता है तो ब्याज दर बहुत ज्यादा हो सकती है. इसके साथ ही अतिरिक्त चार्जेज भी चुकाने पड़ सकते हैं. भले ही वह पूरे कार्यकाल के दौरान कोई क्रेडिट न ले.

‘कब’ में क्या है फर्क

कब आपको बिजनेस लाइन ऑफ क्रेडिट मिलेगा, बिजनेस लोन  से अलग होता है. बिजनेस लोन किसी खास मकसद के लिए लेते हैं जबकि लाइन ऑफ क्रेडिट आप जरूरत पड़ने से पहले भी ले सकते हैं.

लेकिन ध्यान रखें कि लाइन ऑफ क्रेडिट का इस्तेमाल इमरजेंसी में किया जाता है क्योंकि यह आपके कर्ज से आय से अनुपात और क्रेडिट रिपोर्ट को सख्ती से प्रभावित करता है.

तय अवधि या ऋणमुक्ति अवधि

बिजनेस लोन की अवधि तय होती है. इसी वजह से लोन का मासिक भुगतान लाइन ऑफ क्रेडिट की मासिक पेमेंट से ज्यादा होता है. लेकिन आप अन्य कर्जदाताओं जैसे एनबीएफसी का रुख कर सकते हैं, जो बिना कोई गारंटी मांगे  शॉर्ट या लॉन्ग टर्म लोन देते हैं वो भी किफायती ब्याज दर पर.

नोट: होम इक्विटी लाइन ऑफ क्रेडिट में आपका घर गारंटी बन जाता है.  इसलिए, अगर आप उधार ली गई राशि या किसी बचे हुए ब्याज को चुकाने में असमर्थ हैं, तो कर्ज देने वाला आपके घर को कानूनी रूप से जब्त कर सकता है.

अंत में दोनों, बिजनेस लोन और लाइन ऑफ क्रेडिट विभिन्न और फायदेमेंद फंडिंग के विकल्प हैं, जो छोटे बिजनेस की पूंजी की जरूरत को पूरा करते हैं. एक क्षमतावान बिजनेस इनका इस्तेमाल करके अपनी छोटी या लंबी अवधि की पूंजीगत जरूरतों को पूरा कर सकता है.

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