पहली बार घर खरीदने वाले ग्राहक करते हैं ये 11 गलतियां, जानिए

घर खरीदना हम में से कई लोगों के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट से कम नहीं होता. खासकर जब बात पहले घर की हो. घर खरीदना कोई आसान काम नहीं है. घर खरीदने की प्रक्रिया ऐसी है, जो स्कूलों में नहीं सिखाई जाती. इसी वजह से ज्यादातर भारतीय ग्राहकों को जानकारी नहीं होने के कारण वे घर खरीदने में गलती कर बैठते हैं. इसलिए भारत में हर घर खरीदने वाले शख्स को काफी पढ़ना चाहिए ताकि वह होम लोन लेते वक्त गलतियां न करे.

लेकिन अगर हम घर खरीदने और होम लोन के बारे में पढ़ने की कोशिश भी करें तब भी हम लोग गलतियां करते हैं. आइए आपको बताते हैं कि पहली बार घर खरीदने वाले लोग आमतौर पर कौन की गलतियां करते हैं.

पहली गलती

कम डाउन पेमेंट:

घर की डाउन पेमेंट वो होती है, जो होम लोन में कवर नहीं होती. होम लोन में प्रोजेक्ट लागत का अधिकतम 80 प्रतिशत हिस्सा कवर होता है, जबकि बाकी का 20 प्रतिशत ग्राहक को ही चुकाना होता है. इस 20 प्रतिशत राशि को ही होम लोन डाउन पेमेंट कहते हैं. 20 प्रतिशत न्यूनतम राशि होती है, जो खरीददार चुकाता है. लेकिन कोई शख्स जितनी चाहे, उतनी डाउन पेमेंट दे सकता है. यह सलाह दी जाती है कि डाउन पेमेंट ज्यादा देनी चाहिए. जितनी ज्यादा आप होम लोन की डाउन पेमेंट चुकाएंगे, उतनी ही ज्यादा ब्याज पर बचत होगी क्योंकि आपने जो राशि आपने डाउन पेमेंट में चुकाई है, उस पर ब्याज नहीं लगेगा.

 

दूसरी गलती

जरूरत से ज्यादा लोन लेना:

हर किसी का सपना बड़े और शानदार घर में रहने का होता है. इस सपने को पूरा करने में खुद पर जरूरत से ज्यादा वित्तीय बोझ न डालें. कई घर ग्राहक अपनी चुकाने की क्षमता से ज्यादा होम लोन ले लेते हैं. ऐसे मामलों में आपको अपनी रोजमर्रा की जरूरतों से समझौता करना पड़ता है और कई मामलों में लोन चुका भी नहीं पाते.

तीसरी गलती

कर्जदाताओं पर रिसर्च नहीं:

आज के दौर में होम लोन कर्जदाताओं की तादाद काफी ज्यादा है. इसलिए होम लोन अप्लाई करने से पहले आपको विभिन्न कर्जदाताओं के लोन ऑफर्स की तुलना कर लेनी चाहिए, ताकि बेस्ट चुना जा सके. जो पहला कर्जदाता मिला, उसे ही बेस्ट मानकर चुन लेना भी उन बड़ी गलतियों में शुमार है, जो ग्राहक करते हैं.

चौथी गलती

सही लोन कवरेज न खरीदना:

जिस तरह हम लोग अपने घर, कार और स्वास्थ्य के लिए इंश्योरेंस खरीदते हैं, ऐसे ही होम लोन के लिए भी लेनी चाहिए. होम लोन की अवधि लंबी होती है. इसलिए होम लोन इंश्योरेंस न लेने का जोखिम कतई न लें. अगर लोन लेने वाला किसी तरह की त्रासदी, बीमारी, मौत, दुर्घटना या अन्य स्थिति का सामना करता है, जिससे वह ईएमआई चुकाने में असमर्थ हो जाता है तो होम लोन इंश्योरेंस परिवार की मदद करता है.

पांचवी गलती

बिल्डर के बारे में पर्याप्त जानकारी न होना:

किसी भी बिल्डर के साथ डील फाइनल करने से पहले, आपको उस बिल्डर का रिकॉर्ड चेक करना चाहिए. किसी गैर-प्रोफेशनल बिल्डर से घर खरीदने से अच्छा है एक या दो साल इंतजार कर लिया जाए. गलत बिल्डर से घर खरीदने से आपको हर कदम पर मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.

छठी गलती

बिना कानूनी सलाह के कॉन्ट्रैक्ट साइन करना:

किसी दस्तावेज पर कानूनी सलाह लेकर ही दस्तखत करें. प्रॉपर्टी दस्तावेजों की जांच के लिए किसी वकील को हायर करें. इसके बाद ही प्रॉपर्टी को लेकर किसी अंतिम नतीजे पर पहुंचें. प्रॉपर्टी के दस्तावेजों में इस्तेमाल किए गए कई शब्द तकनीकी होते हैं, इसलिए उस क्षेत्र का एक्सपर्ट ही उन्हें बेहतर तरीके से बता सकता है. इसलिए उस बारे में काम किसी एक्सपर्ट को ही करने दें.

 

सातवीं गलती

गलत लोन चुनना:

अगर हमने होम लोन की बात की है तो इसके भी कई प्रकार होते हैं. बैंक फ्लोटिंग ब्याज दर, फिक्स्ड ब्याज दर, सेमी फिक्स्ड ब्याज दर, ओवरड्राफ्ट फायदे वाले होम लोन, इंक्रीमेंटल ईएमआई होम लोन जैसे विकल्प देते हैं. इनमें से कोई भी चुनने से पहले इनके फायदे और नुकसान जरूर समझ लें.

आठवीं गलती

लंबी अवधि के लिए लोन लेना:

होम लोन की अवधि 30 साल तक की हो सकती है. जितनी लंबी होम लोन की अवधि होगी, उतनी कम ईएमआई होगी. इसलिए लोन का बोझ कम पड़ेगा. लेकिन अगर आप कुल खर्च को कैलकुलेट करेंगे तो पाएंगे कि आप मूल राशि पर दोगुना या तीन गुना ज्यादा चुका रहे हैं. अगर आप चाहते हैं कि लोन राशि कम रहे तो लोन की कम अवधि चुनें.

नौंवी गलती

एलिजिबिलिटी चेक न करना:

लोन आवेदक की एलिजिबिलिटी के आधार पर ही लोन मंजूर किया जाता है. होम लोन लेने के लिए आवेदक को कर्जदाता की सभी योग्यताओं पर खरा उतरना होता है. अगर आप योग्य नहीं हैं और होम लोन के लिए अप्लाई करते हैं तो आपकी एप्लिकेशन रिजेक्ट हो जाएगी. एप्लिकेशन रिजेक्ट होने से भविष्य में भी आपकी अन्य लोन एप्लिकेशन रिजेक्ट हो जाएंगी. इसलिए लोन अप्लाई करने से पहले एलिजिबिलिटी जरूर चेक कर लें.

दसवीं गलती

सभी लागतों पर विचार न करना:

घर खरीदने का मतलब यह नहीं होता कि आपने एक निश्चित राशि बिल्डर को दे दी और बात खत्म. इसके साथ कई अन्य खर्चे भी होते हैं, जैसे रजिस्ट्रेशन चार्जेज, स्टैंप ड्यूटी चार्जेज, ब्रोक्रेज (अगर आपने ब्रोकर के जरिए बुक कराया है), वकील की फीस, होम लोन प्रोसेसिंग फीस इत्यादि. जब आप प्रॉपर्टी की कीमत को कैलकुलेट करते हैं तो इन खर्चों पर भी विचार करें.

ग्यारवीं गलती

जमा किए गए ओरिजनल दस्तावेजों की सूची की पावती हासिल न करना:

होम लोन लेने के लिए आपको प्रॉपर्टी के ओरिजनल दस्तावेज कर्जदाता के पास जमा कराने होते हैं. लोन पूरी तरह चुकाए जाने के बाद कर्जदाता आपको प्रॉपर्टी के पूरे दस्तावेज वापस कर देगा और आप घर के मालिक बन जाएंगे. लेकिन तब तक, प्रॉपर्टी के दस्तावेज कर्जदाता के पास ही रहेंगे. दस्तावेज जमा कराने के बाद, पावती लेना न भूलें, ताकि किसी अप्रिय स्थिति में आपके पास सबूत रहे कि दस्तावेज कर्जदाता के पास हैं.

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