पर्सनल लोन लेते वक्त इन 10 सुनहरे नियमों को ध्यान में रखें

टेक्नोलॉजी ने कई चीजों को बदलकर रख दिया है और बैंकिंग व फाइनेंस सेक्टर भी इस बदलाव से अछूता नहीं है. आजकल पर्सनल लोन के एसएमएस, फोन कॉल्स और ईमेल के ऑफर आने आम बात हैं. कुछ कहते हैं कि वे कम ब्याज दरों पर पर्सनल लोन दे रहे हैं जबकि कुछ कहते हैं कि वे तुरंत पैसे वितरण करते हैं. कई लोग इस जाल में फंस जाते हैं और लोन ले बैठते हैं. लेकिन पर्सनल लोन लेते वक्त ऐसी कई चीजें हैं, जो हर किसी को ध्यान में रखनी और स्पष्ट होनी जरूरी हैं. इनमें से कुछ हैं कि क्या पर्सनल लोन की वाकई जरूरत है? अगर हां तो कितनी  और इसके लिए किस कर्जदाता के पास जाना सही रहेगा?

पर्सनल लोन लेते वक्त इन 10 सुनहरे नियमों का पालन करें

जरूरत से ज्यादा कर्ज न लें

भले ही टेक्नोलॉजी ने कर्ज लेने और देने का पूरा सिस्टम ही बदल लिया हो और ग्राहक के लिए कर्ज लेना भी आसान हो गया है. लेकिन बिना किसी खास जरूरत के कर्ज लेना या फिर जरूरत से ज्यादा कर्ज लेने का तुक नहीं बनता. लोन हासिल करना एक खुशी की बात है लेकिन लोन चुकाना कभी खुशी भरा नहीं होता. जितना कर्ज लिया है ईएमआई भी उसी पर निर्भर होती है. ‘हमेशा उतना ही लोन लें, जितना आप वापस चुका सकें’. इन्वेस्टमेंट का एक बड़ा सिद्धांत है कि पर्सनल लोन आपकी मासिक तनख्वाह का 10 प्रतिशत होना चाहिए. ईएमआई भुगतान करने के अलावा आपके पास मासिक जरूरतों के लिए भी पैसा बचा होना चाहिए.

लोन भुगतान वक्त से करें

देर से भुगतान करने को अनुशासनहीनता माना जाता है और इससे आप पर पेनाल्टी लगने के साथ-साथ CIBIL स्कोर भी प्रभावित होता है. CIBIL किसी शख्स के क्रेडिट और फाइनेंशियल हिस्ट्री का लेखा-जोखा होता है. और देर से अगर ईएमआई भरते हैं तो इससे आपका CIBIL स्कोर प्रभावित होता है. इससे ग्राहक की उधार की विश्वसनीयता प्रभावित और भविष्य में उधार मिलने में परेशानी होती है. इसलिए हमेशा वक्त पर ही ईएमआई भरें.

जितनी छोटी हो सके, उतनी कम रखें लोन की अवधि

लंबी अवधि हमेशा लुभावनी होती है क्योंकि इससे ईएमआई कम हो जाती है. लेकिन इस मामले में ग्राहक अनजाने में ही कर्जदाता को कर्ज ली गई राशि से ज्यादा चुका बैठता है. जब अवधि कम होती है तो ईएमआई ज्यादा होती है लेकिन कम समय में उसे चुकाया जाता है और आप कर्जदाता को ब्याज के तौर पर कम राशि चुकाते हैं.

बड़ी लोन राशि पर हमेशा इंश्योरेंस लें

जब लोन की राशि ज्यादा हो तो लोन प्रोटेक्शन इंश्योरेंस लेना बहुत जरूरी है. अगर ग्राहक लोन चुकाने में नाकाम रहता है तो लोन इंश्योरेंस ग्राहक के परिवार के हितों की रक्षा करता है. कई लोन इंश्योरेंस नौकरी जाने, एक्सीडेंट, स्थायी और अस्थायी विकलांगता और मृत्यु को भी कवर करते हैं.
इन मामलों में इंश्योरेंस कंपनियां बाकी की ईएमआई चुकाती हैं

हमेशा सर्वश्रेष्ठ विकल्प को चुनें

मार्केट में पर्सनल लोन के विभिन्न विकल्प मौजूद हैं. लेकिन हर कर्जदाता के रेट्स और चार्जेज अलग-अलग होते हैं. इसलिए पर्सनल लोन लेने से पहले आसपास देखें और तुलना करें. यह काम आप इंटरनेट पर भी आसानी से कर सकते हैं. विभिन्न बैंकों की ब्याज दरें और शुल्क की तुलना करें. फिर सबसे अच्छा कर्जदाता चुनें, जिसकी योग्यता, कर्ज राशि और कार्यकाल आपको सूट करे.

नियम व शर्तें पढ़ लें

किसी भी तरह के कर्ज के लिए ग्राहक को लोन अग्रीमेंट साइन करना होता है. कई लोग इसे जल्दबाजी में साइन कर देते हैं और वे अग्रीमेंट की सारी शर्तें नहीं पढ़ते. हर ग्राहक को यह जरूर समझना चाहिए कि अग्रीमेंट बहुत जरूरी होता है और इसमें लोन के नियम व शर्तें लिखी होती हैं. अग्रीमेंट को ठीक से नहीं पढ़ने और समझने से कई मुश्किलें हो सकती हैं और आप भविष्य में अचानक आने वाले खर्चों से चौंक सकते हैं.

इन्वेस्टमेंट के लिए न लें पर्सनल लोन

पर्सनल लोन असुरक्षित लोन होते हैं, जिनकी ब्याज दर ज्यादा होती है. अगर पर्सनल लोन इन्वेस्टमेंट के मकसद जैसे स्टॉक्स, शेयर्स या फिर बिजनेस के लिए इस्तेमाल किया जाए, जिसमें मुनाफे की कोई श्योरिटी न हो तो ग्राहक के लिए ईएमआई चुकाना मुश्किल हो जाएगा. इसलिए पर्सनल लोन से इन्वेस्टमेंट न ही करें तो बेहतर होगा. इतना ही नहीं इन्वेस्टमेंट का बेसिक आइडिया होता है निवेश किए पैसे से मुनाफा कमाना. इसलिए जो पैसा आपने लोन के जरिए लिया है, उस पर ब्याज भी लगेगा.  जिस जगह आपने इन्वेस्टमेंट किया है, वहां से अगर आपको पर्सनल लोन के ब्याज से ज्यादा पैसे मिल रहे हैं तो उस स्थिति में आप पैसे कमा रहे हैं.

जब भी मुमकिन हो पैसे पहले ही चुका दें

जहां भी पैसे बच सकें, बचाएं. जमा किए हुए पैसों से आप लोन को तय अवधि से पहले ही चुका सकते हैं. बोनस, इन्सेन्टिव्स, हाइक के जरिए लोगों को अतिरिक्त पैसा मिलता है, जिसे आप जमा कर पर्सनल लोन को पहले ही चुका सकते हैं. पर्सनल लोन को वक्त से पहले चुकाने से आपको उस ब्याज पर एक अहम राशि बचाने में मदद मिलेगी, जो कर्जदाता को पूरे कार्यकाल में भुगतान किया गया होगा. ऐसा करने से आप कर्ज मुक्त हो जाएंगे और जो पैसा लोन के भुगतान में जा रहा था, वो अन्य कामों में खर्च हो सकेगा.

पहला खत्म होने तक दूसरा पर्सनल लोन न लें

पहला लोन खत्म होने तक दूसरे के लिए अप्लाई करने का मतलब है कि ग्राहक पैसों का भूखा है और उसकी वित्तीय स्थिरता नहीं है. हो सकता है कर्जदाता उसकी एप्लिकेशन को रिजेक्ट कर दे और CIBIL में भी गिरावट आ जाए. इससे ग्राहक को भविष्य में उधार लेने में मुश्किल हो सकती है. लेकिन अगर पिछला पर्सनल लोन ज्यादा ब्याज दरों पर है तो उसे खत्म करने के लिए नया लोन लेना समझदारी है. अगर कई लोन चल रहे हैं तो कर्ज चकबंदी सिर्फ ईएमआई का भार कम करने में ही मदद नहीं करेगी बल्कि CIBIL स्कोर को भी बेहतर करेगी.

पर्सनल लोन लेने से पहले ईएमआई कैलकुलेट करें

आजकल कई वेबसाइटों पर ऑनलाइन ईएमआई कैलकुलेटर उपलब्ध हैं जहां कुछ ही क्लिक के साथ ईएमआई कैलकुलेट करना आसान है. पहले ही ईएमआई कैलकुलेट करने से आपके सामने भविष्य की तस्वीर साफ हो जाएगी. आपको पता चल जाएगा कि जब लोन रीपेमेंट शुरू होगा तो ये कैसे आपके मासिक बजट पर असर डालेगा. पर्सनल लोन ईएमआई कैलकुलेटर के इस्तेमाल से लोन राशि और अवधि के विभिन्न वर्जन्स पर काम किया जा सकता है.

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